केंद्र सरकार ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए बजट में वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की। इस परियोजना के पूरा होने के बाद जहां अभी यह सफर करीब 15 घंटे में तय होता है, वहीं हाई-स्पीड ट्रेन से यह दूरी महज तीन घंटे में पूरी की जा सकेगी।
इस कॉरिडोर पर प्रस्तावित ट्रेनें 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी। यह न सिर्फ यात्रियों का समय बचाएगा, बल्कि पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी को भी पूरी तरह बदल देगा। सिलीगुड़ी उत्तर-पूर्वी राज्यों का प्रवेश द्वार है, जबकि वाराणसी देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है। ऐसे में यह रेल लिंक सामाजिक, आर्थिक और पर्यटन तीनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
पूर्वी भारत को मिलेगा हाई-स्पीड नेटवर्क
वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के जरिए बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलेगा। इससे न केवल लंबी दूरी की यात्रा आसान होगी, बल्कि व्यापार और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रूट से औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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देश में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान
केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री ने कुल सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की है। इनमें मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी शामिल हैं। इन कॉरिडोरों के जरिए देश के बड़े औद्योगिक, आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र आपस में जुड़ेंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का फोकस
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह लगातार नौवां बजट है। 2026–27 के बजट में सरकार ने रेलवे, विमानन और जल परिवहन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। इन योजनाओं का उद्देश्य कनेक्टिविटी बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स लागत घटाना और देश की आर्थिक वृद्धि को तेज करना है।
