- कांग्रेस ने कहा कि ‘अपने ही लोगों से नफ़रत सिखाई जा रही’
देहरादून । उत्तराखंड के विकासनगर क्षेत्र में कश्मीरी शॉल बेच रहे 17 वर्षीय ताबिश अहमद पर हुए क्रूर हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। छुट्टियों के दौरान अपने परिवार के साथ रोज़गार के लिए बाहर निकले ताबिश को केवल उसकी पहचान के कारण बेरहमी से पीटा गया। लोहे की रॉड और डंडों से किए गए इस हमले में उसके सिर में गंभीर चोट आई, हाथ टूट गया और 11 टांके लगाने पड़े। फिलहाल वह देहरादून के दून अस्पताल में भर्ती है, जहां उसका इलाज जारी है।
पहचान पूछते ही भड़की हिंसा
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) के अनुसार ताबिश और उसका चचेरा भाई एक स्थानीय चाय की दुकान पर बैठे थे। वहां मौजूद कुछ लोगों ने उनसे उनका नाम और पता पूछा। जैसे ही पता चला कि वे कश्मीर से हैं और मुस्लिम हैं, कथित तौर पर उन्हें गालियां दी गईं और फिर अचानक हमला कर दिया गया। दोनों को सड़क पर घसीटा गया और बेरहमी से पीटा गया। स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद ताबिश की हालत गंभीर होने पर उसे देहरादून रेफर किया गया।
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पुलिस की कार्रवाई, एक आरोपी गिरफ्तार
उत्तराखंड पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। देहरादून के एसएसपी अजय सिंह के मुताबिक एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है और अन्य हमलावरों की तलाश जारी है। JKSA ने मुख्यमंत्री, डीजीपी और केंद्रीय गृह मंत्री से हस्तक्षेप कर कश्मीरी छात्रों व व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
कांग्रेस का बीजेपी पर तीखा हमला
इस घटना को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने कहा कि ताबिश का एकमात्र ‘अपराध’ कश्मीरी होना था। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि देश में नफरत का माहौल लगातार बढ़ रहा है और समाज को धर्म व क्षेत्र के नाम पर बांटा जा रहा है। पार्टी ने सवाल उठाया…
“हम एक राष्ट्र के रूप में आखिर किस दिशा में जा रहे हैं?
कांग्रेस ने दोषियों को कड़ी सजा और पीड़ित परिवार को न्याय देने की मांग की है।
उत्तराखंड में बढ़ती नफरती हिंसा पर चिंता
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में मुस्लिम समुदाय और धार्मिक स्थलों के खिलाफ कई हिंसक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कभी मजारों पर बुलडोजर चलाए गए, तो कहीं दुकानदारों को धमकाकर इलाका छोड़ने पर मजबूर किया गया। पुरोला, हल्द्वानी, देहरादून और मसूरी जैसे क्षेत्रों में तनावपूर्ण घटनाओं ने सामाजिक सौहार्द पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों में डर का माहौल
ताबिश पर हमला केवल एक घटना नहीं बल्कि उस भय की तस्वीर है, जो देश के कई हिस्सों में कश्मीरी युवाओं और व्यापारियों के बीच फैलता जा रहा है। पहले जहां लोग गर्मजोशी से उनका स्वागत करते थे, वहीं अब पहचान ही हमले की वजह बनती जा रही है। JKSA ने इसे एक समुदाय को निशाना बनाने की सुनियोजित कोशिश बताया है और कहा है कि यदि सख्त कदम नहीं उठाए गए तो हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल ताबिश की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन यह घटना देश में बढ़ती नफरत और असहिष्णुता पर गंभीर बहस छेड़ चुकी है।
