बजट सत्र 2026 के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अभिभाषण केवल औपचारिक वक्तव्य नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों और भारत के भविष्य की स्पष्ट झलक था। संसद के संयुक्त सत्र में उन्होंने देश की आर्थिक मजबूती, सुरक्षा, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास पर केंद्रित सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा।
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। महंगाई को नियंत्रित रखने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने से आम जनता को राहत मिली है। मध्यम वर्ग और गरीबों के जीवन स्तर में सुधार सरकार की नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने आतंकवाद और माओवाद के खिलाफ सरकार की कठोर नीति को रेखांकित किया। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारतीय सेना ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा के संयुक्त प्रयासों से हिंसा में भारी कमी आई है।
विकास के मोर्चे पर राष्ट्रपति ने ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और पूर्वोत्तर भारत के विकास को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। सोलर पावर सिस्टम के विस्तार से न केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिला है, बल्कि लाखों परिवारों को आत्मनिर्भर भी बनाया गया है। पूर्वोत्तर में सड़कों, रेलवे और सुरक्षा ढांचे में किया गया निवेश आने वाले वर्षों में आर्थिक क्रांति का आधार बनेगा।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर राष्ट्रपति ने विशेष जोर दिया। पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए किसानों को सीधी आर्थिक सहायता दी गई है। पशुपालन, मत्स्यपालन और मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देकर ग्रामीण आय के नए स्रोत तैयार किए गए हैं। मत्स्यपालन में रिकॉर्ड वृद्धि इस नीति की सफलता को दर्शाती है।
महिलाओं को विकास की धुरी बताते हुए राष्ट्रपति ने स्वयं सहायता समूहों, लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को समान अवसर देकर ही विकसित भारत का सपना साकार किया जा सकता है।
अंत में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और खुशहाली लाना है। आत्मनिर्भर और विकसित भारत की यह यात्रा सामूहिक प्रयासों से ही पूरी होगी।
