ऐसा अनोखा बच्चा कि देखकर फूल गए मां बाप के हाथ पांव, इतने सिर और इतने हाथ पैर के साथ जन्मा बच्चा

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   आशीष द्विवेदी

लखनऊ। महराजगंज जिले के एक निजी अस्पताल में एक बेहद दुर्लभ और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दो सिर और चार हाथ-पैर वाले जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ है। ये बच्चे सीने और पेट के हिस्से से आपस में जुड़े हुए हैं, जिन्हें मेडिकल भाषा में कंजॉइंट ट्विंस कहा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति बेहद कम मामलों में देखने को मिलती है और आमतौर पर ऐसे बच्चों के जीवित रहने की संभावना बहुत कम होती है।

यह अनोखी डिलीवरी जिला मुख्यालय से करीब 42 किलोमीटर दूर कोल्हुई स्थित एक निजी अस्पताल में कराई गई। 38 वर्षीय महिला मंजू शर्मा को चौथी बार गर्भधारण हुआ था। अल्ट्रासाउंड में जुड़वां बच्चों की जानकारी मिली थी, लेकिन उनके जुड़े होने की पुष्टि ऑपरेशन के दौरान हुई। डॉक्टरों की टीम ने सफल सिजेरियन ऑपरेशन कर दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। फिलहाल मां और नवजात दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है।

अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अरशद अंसारी ने बताया कि बच्चों के सिर, हाथ और पैर पूरी तरह अलग हैं, लेकिन पेट का हिस्सा आपस में जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि उन्हें अलग करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय ली जा रही है। सरकारी मेडिकल टीम भी बच्चों की लगातार निगरानी कर रही है ताकि भविष्य में सर्जरी की संभावनाओं पर काम किया जा सके।

बच्चों के पिता सनोज शर्मा, जो पेशे से ऑटो चालक हैं, ने सरकार से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और इतने बड़े इलाज का खर्च उठाना उनके लिए संभव नहीं है। पहले से उनके तीन बच्चे हैं और अब जन्मी दोनों जुड़वां बच्चियां भी बेटियां हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकारी सहयोग से बच्चों को बेहतर इलाज मिल सकेगा और उन्हें सुरक्षित तरीके से अलग किया जा सकेगा।

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लखनऊ मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार कंजॉइंट ट्विंस का मामला करीब डेढ़ से दो लाख जन्मों में एक बार सामने आता है। अधिकतर मामलों में बच्चों का जीवित रहना बेहद कठिन होता है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा तकनीक के चलते कुछ मामलों में सफल सर्जरी संभव हो पाई है। भारत में पहले भी मेरठ, बरेली, बदायूं और कुशीनगर जैसे शहरों में ऐसे दुर्लभ मामलों में बच्चों को सफलतापूर्वक अलग किया गया है। फिलहाल महराजगंज के इन जुड़वां बच्चों को लेकर डॉक्टरों की टीम पूरी सतर्कता बरत रही है। आने वाले दिनों में जांच के बाद तय किया जाएगा कि सर्जरी संभव है या नहीं। यह मामला न सिर्फ चिकित्सा जगत के लिए चुनौती है, बल्कि इंसानी जिज्ञासा और उम्मीद का भी प्रतीक बन गया है।

 

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