गणतंत्र दिवस पर विशेष : युवाओं के लिए गणतंत्र दिवस…अधिकार से आगे जिम्मेदारी

राजेन्द्र गुप्ता

भारत का गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन 1950 में भारतीय संविधान के लागू होने की याद दिलाता है। स्वतंत्रता 1947 में मिली, लेकिन संविधान के बिना स्थायी शासन व्यवस्था नहीं थी। 26 जनवरी को भारत गणराज्य बना, जहाँ सत्ता जनता से आती है, न कि किसी राजा या वंश से।

गणतंत्र दिवस का अर्थ गणतंत्र शब्द ‘गण’ (जनता) और ‘तंत्र’ (व्यवस्था) से मिलकर बना है। यह ऐसी व्यवस्था है जहाँ जनता शासक होती है। भारत की विविधता में यह सबसे उपयुक्त है। संविधान सर्वोच्च है, कोई व्यक्ति या संस्था इससे ऊपर नहीं। यह समानता, न्याय और स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।

ऐतिहासिक महत्व 26 जनवरी 1929 में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी। संविधान लागू करने की तारीख इसी से जुड़ी। डॉ. भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में संविधान सभा ने तीन वर्षों में इसे तैयार किया। यह दस्तावेज़ सामाजिक न्याय और लचीलेपन का प्रतीक है।

2026 में गणतंत्र दिवस यह 77वाँ गणतंत्र दिवस है। थीम ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष’ है। परेड कर्तव्य पथ पर होती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ध्वजारोहण करती हैं। सैन्य टुकड़ियाँ, राज्य झांकियाँ और सांस्कृतिक प्रदर्शन दिखते हैं। पहली बार ‘वंदे मातरम’ पर फोकस है, जो देशभक्ति और आत्मनिर्भर भारत को दर्शाता है।

कैसे मनाया जाता है दिल्ली में मुख्य परेड सुबह 10:30 बजे शुरू होती है। इसमें सेना की ताकत, विकास और विविधता दिखती है। स्कूलों में झंडोत्तोलन, भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। पूरे देश में उत्सव फैलता है।

युवाओं की भूमिका युवा लोकतंत्र के भविष्य हैं। गणतंत्र दिवस उन्हें अधिकारों के साथ जिम्मेदारियाँ याद दिलाता है। मतदान, कानून का पालन और सामाजिक योगदान जरूरी है। संविधान समान अवसर देता है। युवा आलोचना से आगे बढ़कर समाधान बनें। निष्कर्ष गणतंत्र दिवस केवल उत्सव नहीं, संवैधानिक मूल्यों का उत्सव है। यह हमें एकजुट, जागरूक और जिम्मेदार बनाता है। आज के बदलते समय में यह और प्रासंगिक है।

 

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