उमेश चन्द्र त्रिपाठी
लखनऊ। गृह मंत्री अमित शाह ऐसे राजनीतिज्ञ हैं, जिनकी हर बात और मुलाकात के बड़े मायने निकलते हैं। वो जब शनिवार दोपहर तीन बजे प्रदेश कार्यालय पहुंचे तो यह तय नहीं था कि किसके साथ और कितनी देर तक बैठेंगे। लेकिन करीब एक घंटे तक सीएम योगी आदित्यनाथ, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के साथ बैठक कर बाहर निकले तो कई राजनीतिक कयास हवा में तैरने लगे। राजनीति के जानकारों का कहना है कि सरकार और संगठन के शीर्ष चेहरों के साथ बैठक कर उन्हें बेहतर समन्वय का संदेश दिया गया है।
शाह की इस बैठक का असर संगठन एवं सरकार में फेरबदल में दिख सकता है। अंत में निकलते समय शाह ने सभी छह महामंत्रियों का भी हालचाल जाना। अन्य पदाधिकारी कार्यालय में उपस्थित रहे। उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहते हुए अमित शाह ने 2014 में सूबे में अस्सी में अस्सी का फॉर्मूला दिया था। वह यूपी के भूगोल से पूरी तरह परिचित हैं जिसका दावा उन्होंने यूपी दिवस के कार्यक्रम के मंच से भी किया।
इधर, प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी को चुनने के बाद पार्टी के सामने मिशन-2027 को लेकर कई चुनौतियां हैं। जहां एक ओर जातीय एवं क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखते हुए प्रदेश इकाई का गठन होना है, वहीं चुनाव से पहले एक बार योगी मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर चर्चा है। इस सभी विषयों पर लखनऊ से दिल्ली तक कई बार मंथन हो चुका है। लेकिन नए प्रदेश अध्यक्ष के बनने के बाद और अब मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच अमित शाह की लखनऊ में बैठक के मायने बढ़ गए हैं।
