- संभल हिंसा: विवादित पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी पर कोर्ट का आदेश ठुकराने की कोशिश
- मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दिया फैसला, कहा-‘एफआईआर दर्ज की जाए’
नया लुक संवाददाता
लखनऊ। अपनी हीरोपंती के लिए पूरे सूबे में चर्चित अनुज चौधरी को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। मि. वायरल के नाम से मशहूर हो रहे अनुज चौधरी समेत इंसपेक्टर पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया है। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा अब नए विवाद में घिर गई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने नौ जनवरी 2026 को आदेश दिया कि तत्कालीन सर्कल ऑफिसर (CO) अनुज चौधरी (वर्तमान में फिरोजाबाद में एएसपी ग्रामीण), इंस्पेक्टर अनुज तोमर (वर्तमान में चंदौसी कोतवाली प्रभारी) और 20 अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। यह आदेश पीड़ित यामीन की याचिका पर पारित हुआ, जिनके 24 वर्षीय बेटे आलम को पुलिस फायरिंग में गोली लगी थी। आलम रस्क बेचने निकला था और मस्जिद क्षेत्र पहुंचते ही गोलीबारी का शिकार हुआ। परिवार ने इलाज गुप्त रूप से कराया, क्योंकि पुलिस दबाव का डर था। CJM विभांशु सुधीर ने याचिका की सुनवाई के बाद प्रथम दृष्टया मामला बनता पाया और बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत FIR का निर्देश दिया। पीड़ित वकील अख्तर हुसैन ने कहा कि अदालत ने आरोपों को गंभीर माना और जांच जरूरी ठहराई। यदि FIR नहीं हुई तो हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल करेंगे।
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हालांकि, संभल SP कृष्ण कुमार बिश्नोई ने आदेश को अवैध बताते हुए FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हिंसा की मजिस्ट्रियल जांच हो चुकी है, जिसमें पुलिस कार्रवाई सही पाई गई। आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे। पुलिस का दावा है कि हिंसा में भीड़ ने पथराव और फायरिंग की, जिसमें चार नागरिक मारे गए और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए। 79 गिरफ्तारियां हुईं, 12 FIR दर्ज की गईं, जिसमें सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क जैसे नाम शामिल हैं।
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बताया गया है कि अनुज चौधरी पहले से विवादास्पद रहे हैं। मार्च 2025 में शांति समिति बैठक में उन्होंने कहा कि होली साल में एक बार आती है, जुमे की नमाज 52 बार, इसलिए मुस्लिम भाई घर में रहें। यह बयान सुर्खियों में रहा, सीएम योगी ने इसे पहलवान स्टाइल में ठीक ठहराया। चौधरी पूर्व पहलवान और अर्जुन अवॉर्डी हैं। उन्होंने वर्दी में हनुमान गदा लेकर जुलूस निकाला, जिस पर नोटिस मिला। विपक्ष ने उन्हें भाजपा एजेंट बताया। यह मामला धार्मिक संवेदनशीलता और पुलिस जवाबदेही पर सवाल उठाता है। पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में है, जबकि पुलिस उच्च अदालत में चुनौती दे रही है। घटना ने सांप्रदायिक तनाव को उजागर किया, जहां मस्जिद को हरिहर मंदिर बताकर सर्वे का दावा किया गया था।
