धर्म के नाम पर जिस्म से खेलते हैं ये कथित बाबा, पादरी, मौलवी और धर्मगुरु

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अच्युतानंद पाठक

धर्म की खासीयत यही रही है कि हर प्रकार के दुराचार के बावजूद यह न केवल पिछले चार हजार बरसों से किसी न किसी रूप में समाज में मौजूद है। यह समाज की सभ्यता का लाभ जमकर उठा रहा है। दुनिया भर में यौन दुराचार की पीड़ित औरतें आमतौर पर पादरियों, मुल्लाओं और पंडों के खिलाफ नहीं बोलतीं, क्योंकि उन्हें तो धर्म के नाम पर गुलाम बना लिया जाता है। औरतों पर धर्म का मानसिक शिकंजा इतना ज्यादा है कि वे यौन संबंधों के बदले जरा सा भी सुख पाने पर अपने को धन्य समझती हैं।

धर्म यदि सदाचार सिखाता तो कैथोलिक ईसाई चर्च के मुखिया पोप को पादरियों द्वारा यौन दुराचार किए जाने के उन दो हजार मामलों को सुनना न पड़ता। धर्म यदि सदमार्ग दिखाता तो आशाराम और रामरहीम न पैदा होते। धर्म यदि सच्ची राह दिखाता तो मौलानाओं पर यौन दुराचार के आरोप न लगते। आपके मन में धर्म को लेकर यह सवाल उपज रहे होंगे। लेकिन यह सच नहीं है, धर्म के नाम पर धर्मगुरु अपना धंधा चमकाते हैं तब धर्म बदनाम होता है। धर्म के नाम पर जब बाबा अपनी हवस पूरी करता है, तब धर्म बदनाम होता है।

यह सच है कि हजारों शिकायतें चर्चों में और पड़ी हैं, उन में से कुछ को वर्षों दबाए रखा जाता है तो कुछ पर फैसला किया जाता है। अविवाहित रहने का संकल्प लेने वाले पादरी और अन्य कैथोलिक चर्चों के पुजारियों द्वारा यौन दुराचार किए जाने की लाखों पीडि़ताएं हैं पर ज्यादातर चुप ही रहती हैं। उन्हें धर्म के ठेकेदार बता देते हैं कि यह उनके पापों की सजा है। हिंदू धर्म की तरह ईसाई धर्म में भी पाप और पुण्य की मजेदार कहानियां हैं, जिनका असल अर्थ यह है कि हर भक्त पापी है इसलिए जम कर पुजारियों की सेवा करे, मन और धन से ही नहीं, तन से भी।

हाल के वर्षों में हर देश में कानूनों को धर्म के नीचे रखने की कोशिश की जा रही है। ISIS पश्चिम एशिया में चला और वहां नागरिक कानून व्यवस्था को हटा कर खलीफा का कानून लागू कर दिया। जिसके तहत धार्मिक फौज को पैसे, औरतें और मनमानी करने के सुख मिलने लगे। भारत में गौरक्षकों और रोमियो भक्षकों को मिले अनैतिक अधिकार आज सरकार के लिए ऐसे कर्मठ सिपाही मुहैया करा रहे हैं जिन की वजह से सरकार मनमानी कर पा रही है। यही पोपों के युग में सदियों तक होता रहा है।
यदि कुछ बुद्धिजीवी यह कहें कि डोनाल्ड ट्रंप, व्लादिमीर पुतिन और नरेंद्र मोदी इसलिए चुनाव जीते हैं क्योंकि उन्होंने बड़ी साफगोई से धर्म का इस्तेमाल किया है, तो कहीं न कहीं सच जरूर है। दुखद यही है कि अब नेता रंग, जाति, नस्ल, भाषा किसी का भी प्रयोग कर भक्तों पर होने वाले खुद के अत्याचारों व अपराधों को दबा कर रखना चाहते हैं। हम आपको जगना होगा, सुधरना होगा और किसी के बहकावे से दूर रहना होगा।

(लेखक लखनऊ हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं और धर्म पर करीब 20 साल से शोध कर रहे हैं।)

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