प्रयागराज के माघ मेले में इस बार आस्था से ज़्यादा चर्चा एक संत की लाइफस्टाइल की हो रही है। साधारण वेश, लंबी जटाएं और माथे पर चंदन, लेकिन सवारी ऐसी कि बड़े कारोबारी भी पीछे छूट जाएं। बात हो रही है सतुआ बाबा की, जिनका नाम इस बार माघ मेले के सबसे चर्चित धर्मगुरुओं में शुमार हो गया है।
पहले डिफेंडर कार में बाबा की तस्वीरें सामने आईं। फिर पोर्शे में उनकी सवारी ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। अब बाबा ने स्पोर्ट्स कैटेगरी की मर्सिडीज़ कार लाकर एक बार फिर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। खास बात यह रही कि इस मर्सिडीज़ की नंबर प्लेट की जगह “जगतगुरु सतुआ बाबा” लिखा गया है और बाकायदा गाड़ी की पूजा भी की गई।
साधु-संतों की सादगी और त्याग की परंपरा के बीच बाबा की यह शानो-शौकत कई लोगों को चौंका रही है। सोशल मीडिया पर सवाल उठे—क्या संतों को इतनी महंगी गाड़ियों की ज़रूरत है? क्या यह सन्यास की मूल भावना से मेल खाता है?
इन सवालों के जवाब में सतुआ बाबा खुद सामने आए। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह कभी ठेले पर बैठे दिखाई देते हैं, कभी ऊंट की सवारी करते हैं और फिर लग्ज़री गाड़ियों में सफर करते नजर आते हैं। बाबा का कहना है कि साधन व्यक्ति की सोच से तय होते हैं, जीवनशैली से नहीं। बाबा ने अपने बयान में राजनीति को भी शामिल किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि एक दौर ऐसा था जब सत्ता में रहते हुए निजी जहाजों में मनोरंजन होता था, जबकि आज योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति को सम्मान मिल रहा है।
माघ मेले में बाबा की मौजूदगी अब केवल आध्यात्मिक नहीं रही, बल्कि वह एक सामाजिक बहस का चेहरा बन गए हैं—आस्था बनाम आधुनिकता की बहस। कुछ लोग उन्हें सनातन का आत्मविश्वास मानते हैं, तो कुछ इसे दिखावा कह रहे हैं।
