बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को लखनऊ में अपना 70वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी सहित अन्य राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोला। मायावती ने कहा कि आज की सरकारें बसपा शासनकाल में चलाई गई जनकल्याणकारी योजनाओं का केवल नाम बदलकर श्रेय लेने का काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि विरोधी दलों ने साजिश के तहत बसपा को कमजोर करने और तोड़ने की कोशिश की है, लेकिन पार्टी पूरी मजबूती के साथ खड़ी है। मायावती ने आरोप लगाया कि बसपा संस्थापक कांशीराम के निधन पर राष्ट्रीय शोक तक घोषित नहीं किया गया, जिससे उनकी उपेक्षा स्पष्ट होती है। उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों, ब्राह्मणों और मुस्लिम समाज के साथ लगातार अन्याय हो रहा है।
मायावती ने ब्राह्मण समाज को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि उन्हें दिखावटी सम्मान नहीं, बल्कि वास्तविक सम्मान चाहिए। “ब्राह्मणों को चोखा-बाटी नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक सम्मान चाहिए,” उन्होंने कहा। बसपा सुप्रीमो ने दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कभी दंगे-फसाद नहीं हुए और सभी वर्गों का समान ध्यान रखा गया, जिसमें यादव समाज भी शामिल था।
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मायावती ने साफ किया कि बसपा किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन से पार्टी को हमेशा नुकसान हुआ है। अपर कास्ट का वोट जातिवादी पार्टियों में चला जाता है, इसी कारण अन्य दल बसपा से गठबंधन करना चाहते हैं। भविष्य में जब अपर कास्ट का भरोसा पूरी तरह बसपा को मिल जाएगा, तब गठबंधन पर विचार किया जाएगा, लेकिन इसमें अभी लंबा समय लगेगा।
ईवीएम और एसआईआर को लेकर मायावती ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं को लेकर कई शिकायतें हैं और पार्टी को पूरी सतर्कता बरतनी होगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि किसी भी तरह के भ्रम में न आएं।
