छात्र संघ राजनीति से निकले नेताओं की अलग ही पहचान

विजय श्रीवास्तव

बढ़नी/लखनऊ। आज की राजनीति में युवा नेतृत्व की बात करें तो मन उदास हो जाता है। दशकों पुरानी एक फोटो देखकर अहसास होता है कि जुझारू, संघर्षशील और जमीनी स्तर से उभरे नेता अब लगभग विलुप्त हो चुके हैं। अब हाइब्रिड नेतृत्व का दौर है-धनबल, ब्रांड वैल्यू और पार्टी की ताकत से चुनाव जीत लेना आम बात हो गई है, लेकिन केवल चुनाव जीतना किसी को महान नेता नहीं बनाता। इसका सबसे बड़ा प्रमाण लोकनायक जयप्रकाश नारायण हैं, जिन्होंने कभी कोई औपचारिक पद नहीं संभाला, फिर भी भारतीय इतिहास में अमर हो गए।

पहले दौर में वैचारिक संगठन जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और कांग्रेस सेवा दल  ने ऐसे कठोर कार्यकर्ता तैयार किए जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे। एक प्रसिद्ध घटना 1959 की है, जब नाशिक अधिवेशन में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पहुंचे तो गेट पर कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ता कमलाकर शर्मा ने उन्हें रोका। नेहरू ने पूछा, “क्या तुम मुझे पहचानते हो? शर्मा ने जवाब दिया, “जी हां, आप देश के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन यह कांग्रेस का अधिवेशन है और आपने गेट पास नहीं लगाया।” ऐसे ही संघर्षशील कार्यकर्ताओं में लाल बहादुर शास्त्री और RSS से अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान नेता उभरे।

इसी तरह देश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र संघ राजनीति ने भी असाधारण नेतृत्व दिया। नारे थे-“हर जोर-जुल्म के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है, “आवाज दो, हम एक हैं” इन नारों से प्रशासन कांप उठता था। इसी छात्र संघ आंदोलन से निकले चंद्रशेखर (पूर्व प्रधानमंत्री), सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, ममता बनर्जी, जगदंबिका पाल, बृजभूषण शरण सिंह  जैसे दर्जनों बड़े नेता सामने आए, पर आज की राजनीति मुख्य रूप से पैसे, पावर और चाटुकारिता तक सिमट गई है। जमीनी संघर्ष, वैचारिक दृढ़ता और जन-संघर्ष की जगह अब परिक्रमा और ब्रांडिंग ले रही है। यदि यह सिलसिला जारी रहा तो भारत के भविष्य के लिए यह घातक साबित हो सकता है। सच्चा नेतृत्व वही है जो जन-संघर्ष से जन्म ले और जन-कल्याण के लिए समर्पित रहे।

Crime News homeslider Uttar Pradesh

जांच करते-करते दिल दे बैठे दरोगा जी, परेशान महिला ने SP से की शिकायत

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। रामनगर थाने में तैनात एक दरोगा पर आरोप है कि वह एक पारिवारिक विवाद की जांच के दौरान पीड़िता से निजी संबंध बनाने की कोशिश करने लगा। महिला ने आरोप लगाया है कि दरोगा ने जांच के बहाने फोन […]

Read More
homeslider Odisha

दलित महिला की नियुक्ति के विरोध में तीन महीने से बंद आंगनवाड़ी केंद्र

ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले से आई यह खबर सिर्फ एक प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक आईना है। एक छोटी सी आंगनवाड़ी, जहां बच्चों की किलकारियां गूंजनी चाहिए थीं, वहां पिछले तीन महीनों से सन्नाटा पसरा है। वजह है एक युवती की नियुक्ति, जिसे कुछ लोगों ने जातिगत आधार पर स्वीकार नहीं […]

Read More
homeslider Politics

घूसखोर पंडत’ की रिलीज पर संकट, सुप्रीम कोर्ट ने फिल्ममेकर को लगाई कड़ी फटकार

मनोज बाजपेयी की चर्चित फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ अपनी रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। फिल्म के शीर्षक को लेकर उठे विवाद पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने फिल्म निर्माता-निर्देशक नीरज पांडे से सवाल किया कि किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला शीर्षक क्यों चुना गया। […]

Read More