
अटल जी सचमुच अटल थे।
राष्ट्रहित चिंतक प्रखर थे।।
अमृत जिसके उर बसा था,
देश हित जीवन कसा था ,
संयमित वाणी मुखर था ,
देश हित जिनमे प्रबल था ।
हिमालय से वह अचल थे।
अटल जी सचमुच अटल थे।।१।।
सिंह सा वे गरजते थे।
भाव मे वे लरजते थे ।
संसदी इतिहास मे वे,
राष्ट्रवादी ही प्रबल थे ।।
गरजते सागर प्रबल थे।
अटल जी सचमुच अटल थे।२।।
सत्य को स्वीकारते थे।
झूठ को दुतकारते थे।।
सही कामों के समर्थक।
गलत हो, ललकारते थे।।
सूर्य से वे तेज- मय थे।
अटल जी सचमुच अटल थे।।३।।
राष्ट्र भाषा के समर्थक।
मातृभू प्रति थे समर्पित।।
था कोई मुद्दा न ऐसा।
मुखर हो जिस पर न बोले ।
हृदय कोमल मन अमल थे ।
अटल जी सचमुच अटल थे ।।४।।
अटल बिहारी बाजपेयी के चरणों मे अर्पित-भावपुष्प
