ए अहमद सौदागर
लखनऊ। नशे में इस्तेमाल होने वाली फेंसेडिल कफ सीरप के मामले सिलसिलेवार तरीके से हो रही गिरफ्तारी होने के बाद अभी कईयो गोरखधंधे करने वाले तस्कर पुलिस अफसरों की कसौटी पर हैं। सूबे के अलग-अलग जिलों के थानों में हुई रिपोर्ट पर जांच एजेंसी और एसटीएफ की टीमें उन पर नजरें गड़ा दी है और उम्मीद है कि जल्द ही बाकी तस्कर भी सलाखों के पीछे होंगे।
27 नवंबर 2025 को नशे में इस्तेमाल होने वाली फेंसेडिल कफ सीरप और कोडिन युक्त दवाएं झारखंड से बांग्लादेश तक सप्लाई करने वाले तस्कर जौनपुर निवासी अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा को एसटीएफ ने गोमतीनगर क्षेत्र स्थित ग्वारी के पास से दबोचा था।
30 नवंबर 2025 को प्रतिबंधित अवैध कफ सीरप की तस्करी गिरोह के सरगना शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद जायसवाल को सोनभद्र पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने कोलकाता हवाईअड्डे से गिरफ्तार किया था। दो दिसंबर 2025 को नशीले कफ सीरप सिंडिकेट के अहम सदस्य बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह यूपी एसटीएफ गोमतीनगर विस्तार से गिरफ्तार किया था। 11 दिसंबर 2025 को अवैध कफ सीरप की तस्करी करने वाले दो सगे भाइयों सहारनपुर के कपिल बिहार निवासी अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा को एसटीएफ ने राजधानी लखनऊ के मवैया क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। जबकि इस गोरखधंधे का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल अभी भी पुलिस और एसटीएफ टीम की पकड़ से दूर है। जानकार सूत्र बताते हैं कि इस गोरखधंधे से जुड़े अभी भी कईयो तस्कर आजाद बनकर घूम रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पुलिस से बचने के लिए कई तस्कर तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं, लेकिन पुलिस और एसटीएफ की धरपकड़ की आहट सुन उनकी नींदे गायब है।
इस गोरखधंधे से जुड़े कई तस्कर एसटीएफ के रडार पर हैं और उनकी गर्दन तक पहुंचने के लिए जाल बिछा दिया है। बताया जा रहा है कि नशे में इस्तेमाल होने वाली फेंसेडिल कफ सीरप के मामले में एसटीएफ को कई पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं कि कौन-कौन इस धंधे से जुड़े हैं। एसटीएफ टीम बहुत जल्द ही इनके चेहरे बेनकाब कर सबके सामने खड़ा कर सकती है। जांच पड़ताल के बाद तस्करों की कुंडली खुलने लगी है। बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह हो या फिर अमित टाटा काली कमाई से करोड़ों की संपत्ति बना रखा है। बताया जा रहा है कि इस इसी गोरखधंधे के चलते सरगना शुभम जायसवाल, बर्खास्त सिपाही आलोक व अमित टाटा कई बार विदेशों का सफर तय कर चुके हैं।
