उत्तर प्रदेश भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर महीनों से जारी चर्चाएं अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी हैं। प्रांतीय परिषद के सदस्यों की घोषणा होते ही चुनाव को लेकर संगठन में हलचल बढ़ गई है। लखनऊ में होने वाला यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लगभग 400 सदस्य भाजपा के अगले प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव करने वाले हैं।
भाजपा के संविधान के मुताबिक सबसे पहले प्रांतीय परिषद के सदस्य निर्धारित किए जाते हैं। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से एक सदस्य चुना जाता है, लेकिन यह चयन केवल वहीं से किया जाता है जहां जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी हो। उत्तर प्रदेश को 98 जिलों में विभाजित किया गया है, जिनमें से 84 जिलाध्यक्षों की घोषणा पूरी हो चुकी है। इससे जुड़े 350 से अधिक परिषद सदस्य भी तय किए जा चुके हैं।
इसके अलावा विधान सभा और विधान परिषद के कुल 337 सदस्यों में से 10 प्रतिशत यानी 34 प्रतिनिधि परिषद में शामिल होंगे। संसद के 57 सदस्यों में से 6 सांसद परिषद का हिस्सा बनेंगे। इस प्रकार परिषद का ढांचा लगभग पूरी तरह तैयार हो चुका है। क्योंकि 50 प्रतिशत जिलाध्यक्षों की नियुक्ति जरूरी शर्त होती है, और अभी 86 प्रतिशत जिलाध्यक्ष घोषित हैं, इसलिए चुनाव में कोई तकनीकी दिक्कत नहीं बची है।
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प्रदेश के 1918 मंडलों में से 1600 से ज्यादा मंडलों के चुनाव भी पूरे हो चुके हैं, जो संगठन की मजबूती को दर्शाते हैं। अब प्रक्रिया के अनुसार जल्द ही मतदान सूची जारी की जाएगी। इसके बाद दो दिन महत्वपूर्ण होंगे—पहले दिन नामांकन, सत्यापन और नाम वापस लेने की प्रक्रिया होगी। यदि केवल एक उम्मीदवार नामांकन दाखिल करता है तो अध्यक्ष सर्वसम्मति से चुन लिया जाएगा। अन्यथा मतदान और मतगणना होगी। नामांकन में प्रस्तावक के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और संगठन के शीर्ष नेता शामिल हो सकते हैं। वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे वरिष्ठ नेता प्रस्तावक बनने की संभावना है।
