पिशाचमोचन श्राद्ध: प्रेतयोनि से मुक्ति का पावन अवसर

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राजेन्द्र गुप्ता

हिंदू धर्म में पितरों की शांति और उनकी सद्गति के लिए कई विशेष श्राद्ध तिथियाँ निर्धारित हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है पिशाचमोचन श्राद्ध। यह श्राद्ध मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में यह पवित्र तिथि 3 दिसंबर, बुधवार को है। खास तौर पर उत्तर भारत, विशेष रूप से वाराणसी, गया और प्रयागराज जैसे तीर्थ क्षेत्रों में इस दिन लाखों श्रद्धालु पिशाचमोचन कुंड, गयाजी और अन्य पवित्र स्थानों पर एकत्र होते हैं।

पिशाचमोचन श्राद्ध क्यों किया जाता है?

मान्यता है कि जिन लोगों की मृत्यु दुर्घटना, हत्या, आत्महत्या या किसी अप्राकृतिक कारण से हुई हो, उनकी आत्मा प्रेत या पिशाच योनि में भटकती रहती है। ऐसी आत्माएँ न तो स्वर्ग जा पाती हैं और न ही पुनर्जन्म ले पाती हैं। इस श्राद्ध के माध्यम से पितरों को प्रेतयोनि से मुक्ति (मोक्ष) मिलती है और वे शांतिपूर्वक परलोक गमन करते हैं। यह श्राद्ध विशेष रूप से उन परिवारों के लिए अनिवार्य माना जाता है जिनके पूर्वजों की अकाल मृत्यु हुई हो।

सरल विधि-विधान

इस दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संकल्प लें कि आज आप अपने पितरों विशेषकर जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो, उनके लिए पिशाचमोचन श्राद्ध कर रहे हैं।

  • ताँबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल लें, उसमें दूध, दही, घी, शहद, कुमकुम, अक्षत, काले तिल और कुशा डालें।
  • दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठें।
  • हाथ में जल लेकर मृत व्यक्ति का नाम-गोत्र उच्चारण करें और जल भूमि पर छोड़ें।
  • तर्पण के बाद सभी भटकती प्रेतात्माओं के लिए भी प्रार्थना करें।
  • पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएँ, भगवत कथा सुनें और ब्राह्मण को दान-दक्षिणा दें। इस दिन व्रत रखना, जप-तप करना और दान करना अत्यंत पुण्यदायी होता है।

इस श्राद्ध का महत्व

शास्त्रों में कहा गया है कि पिशाचमोचन श्राद्ध से पितृदोष दूर होता है। परिवार में बार-बार आने वाली बीमारियाँ, व्यापार में हानि, संतान सुख में बाधा आदि समस्याएँ पितृदोष के कारण ही होती हैं। इस दिन किया गया श्राद्ध अक्षय फल प्रदान करता है और पितर प्रसन्न होकर वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। भगवान विष्णु की विशेष कृपा इस तिथि पर प्राप्त होती है, जिससे तन-मन-धन के सभी कष्ट दूर होते हैं। इस पावन दिन को अवसर बनाएँ, अपने पितरों को प्रेतयोनि से मुक्त कर उनके आशीर्वाद से जीवन को सुख-शांति से भरें।

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