BJP की ‘सोनिया गांधी’ ने कांग्रेस और CPI(M) को दी कड़ी टक्कर

केरल के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मुनार में पंचायत चुनाव का एक वार्ड सुर्खियों की चढ़ता जा रहा है। यहां भाजपा ने एक ऐसी उम्मीदवार उतारी है, जिसका नाम सोनिया गांधी है। जी हां, वही सोनिया गांधी, जो कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष हैं। लेकिन यह कोई साजिश नहीं, बल्कि एक साधारण महिला का संयोग है, जिसका नाम उसके पिता ने कांग्रेस नेता के सम्मान में रखा था। नल्लाथन्नी वार्ड (वार्ड नंबर 16) से भाजपा टिकट पर लड़ रही 34 वर्षीय सोनिया गांधी का यह पहला चुनाव है। उनके खिलाफ कांग्रेस की मंजुला रमेश और CPI(M) की वलारमती मैदान में हैं। इस नाम के कारण वार्ड का चुनाव राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है, और लोग आश्चर्य से पूछ रहे हैं – ‘क्या सोनिया गांधी कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं?’

मुनार पंचायत के इस चुनाव में कुल 75,000 से अधिक उम्मीदवार 21,000 वार्डों के लिए मैदान में हैं। लेकिन नल्लाथन्नी वार्ड की यह जंग अलग ही रंग ला रही है। सोनिया गांधी मूल रूप से नल्लाथन्नी कल्लार की रहने वाली हैं। उन्होंने शादी के बाद राजनीति में कदम रखा। उनका पति सुबाष भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता है और वर्तमान में पंचायत का महासचिव है। सुबाष ने डेढ़ साल पहले पुराने मुनार मूळककाड़ा वार्ड के उपचुनाव में भाजपा से चुनाव लड़ा था। अब पत्नी सोनिया उनके नक्शेकदम पर चल पड़ी हैं। राजनीति में प्रवेश से पहले सोनिया मुनार शहर के एक दुकान पर काम करती थीं। भाजपा ने उन्हें टिकट देकर एक रणनीतिक दांव खेला है, जो नाम के कारण ही वायरल हो गया।

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यह संयोग कितना दिलचस्प है? सोनिया गांधी (भाजपा वाली) का जन्म 1990 के दशक में हुआ, जब कांग्रेस नेता सोनिया गांधी देश की राजनीति में उभर रही थीं। उनके पिता, एक कट्टर कांग्रेसी, ने बेटी का नाम उसी के सम्मान में रखा। लेकिन समय ने करवट ली। शादी के बाद सोनिया ने भाजपा का दामन थाम लिया। अब वे यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की मंजुला रमेश और लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की वलारमती से भिड़ रही हैं। मंजुला, एक अनुभवी स्थानीय कार्यकर्ता, अब इस ‘नाम वाली चुनौती’ से जूझ रही हैं। वहीं, वलारमती को लगता है कि भाजपा-कांग्रेस की इस रस्साकशी में LDF फायदा उठा लेगी।

केरल के स्थानीय निकाय चुनाव दो चरणों में 9 और 11 दिसंबर को होंगे। मुनार, वेस्टर्न घाट्स की गोद में बसा पर्यटन स्थल, हमेशा से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। यहां चाय बागानों के मजदूरों की बहुलता है, और वोट बैंक लेफ्ट, कांग्रेस और उभरती भाजपा के बीच बंटा हुआ है। भाजपा का यह दांव न केवल स्थानीय स्तर पर चर्चा बटोर रहा है, बल्कि राष्ट्रीय मीडिया में भी हलचल मचा दिया है। विपक्षी दलों ने इसे ‘नाम का दुरुपयोग’ बताकर आलोचना की, लेकिन भाजपा कार्यकर्ता इसे ‘लोकप्रियता का फायदा’ मान रहे हैं। सोनिया गांधी कहती हैं, “मेरा नाम संयोग है, लेकिन मेरा संघर्ष असली है। वार्ड के विकास के लिए मैं लड़ींगी – सड़कें, पानी, शिक्षा।”

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