वाराणसी के पवित्र नमो घाट पर आज (मंगलवार) से ‘काशी तमिल संगमम्’ के चौथे संस्करण का रंगारंग आगाज़ होगा। उत्तर और दक्षिण भारत की प्राचीन सांस्कृतिक कड़ी को और मजबूत करने वाले इस महोत्सव की थीम इस बार है – ‘तमिल करकलाम’ यानी “तमिल सीखें”। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ विजन का यह अनुपम आयोजन काशी को तमिलनाडु की खुशबू से महका देगा।
उद्घाटन समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि, पुडुचेरी की उपराज्यपाल डॉ. के. कैलासनाथन समेत कई गणमान्य अतिथि शामिल होंगे। मंच पर काशी के शिव-भक्ति नृत्य और तमिलनाडु के भरतनाट्यम, ओप्पना, करगम व पारंपरिक परई वादन की एक साथ प्रस्तुति होगी, जो भारत की विविधता में एकता का जीवंत चित्र प्रस्तुत करेगी।
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तमिलनाडु से 1400 से अधिक प्रतिनिधि काशी पहुंच चुके हैं। पहले जत्थे में चेन्नई से 87, तिरुचिरापल्ली से 86 और कन्याकुमारी से 43 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। ये मेहमान सबसे पहले हनुमान घाट पर गंगा स्नान करेंगे, फिर दक्षिण भारतीय शैली के प्राचीन मंदिरों – काशी के कमकोटि मठ, शंकराचार्य मठ और अन्य स्थलों के दर्शन करेंगे। इसके बाद श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में पूजन-अर्चन और माँ अन्नपूर्णा रसोई में प्रसाद ग्रहण करेंगे। शाम को नमो घाट पर भव्य उद्घाटन के बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अकादमिक सत्रों का सिलसिला शुरू होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ में इस आयोजन का विशेष उल्लेख करते हुए कहा था कि काशी-तमिल संगमम् अब तमिल प्रेमियों के लिए तीर्थ बन चुका है। उन्होंने देशवासियों से इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की थी। एक महीने तक चलने वाले इस संगमम् में कार्यशालाएं, सेमिनार, सांस्कृतिक संध्या, प्रदर्शनियां और गंगा आरती में तमिल भजन की प्रस्तुति होगी।
