- मांग पूरी नहीं होने पर आधा दर्जन बंदियों को भेज दिया भंडारा
- जेल प्रशासन के उत्पीड़न से कई बंदियों के हाथों में पड़ गए छाले
- महानिदेशक कारागार की हिदायतों के बाद भी नहीं सुधर रहे जेल अधिकारी
नया लुक ब्यूरो
लखनऊ। महानिदेशक कारागार की तमाम हिदायतों के बाद भी जेल अधिकारी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का ताजा मामला जौनपुर जेल का है। इस जेल में जेल अधिकारियों ने मोटी रकम लेकर गिनती काटने के लिए आधा दर्जन बंदियों को भंडारे में लगा रखा है। वसूली की मोटी रकम (एक लाख )नहीं दे पाने वाले इन बंदियों के भंडारे में काम करते करते हाथों में छाले तक पड़ गए है। इस अमानवीय कृत के बाद भी जेल अधिकारियों का दिल पसीज नहीं रहा है। उत्पीड़न और अवैध वसूली से बंदियों का जेल में एक एक दिन काटना मुश्किल हो गया है। उधर विभाग के अधिकारी इस गंभीर मसले पर आरोप को नकारते हुए कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं।
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मिली जानकारी के मुताबिक अलीगढ़ निवासी ऋषिपाल (टिंकू) पुत्र इंद्रपाल, बृजलाल (चोईया) पुत्र विशंभर सिंह, योगेश (मला) पुत्र नेम सिंह, श्याम पुत्र संजय सिंह, आदर्श पुत्र शंकर प्रधान और मथुरा निवासी ललित पुत्र नरेंद्र सिंह, हरेंद्र पुत्र ब्रह्मजीत को पुलिस ने गिरफ्तार कर जौनपुर जेल भेजा। पश्चिम के जनपदों से जेल पहुंचे इन बंदियों के जेल पहुंचते ही जेल प्रशासन के अधिकारियों ने बंदियों का उत्पीड़न करना शुरू कर दिया। अधिकारियों के उत्पीड़न का यह आलम है कि बंदियों का जेल में एक एक दिन काटना मुश्किल हो गया है।
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सूत्रों का कहना है कि जेल में आमद होने के बाद से जेल प्रशासन के अधिकारियों ने बंदियों से गिनती कटवाने के लिए प्रति बंदी एक लाख रुपए की मांग की। पश्चिम के गांवों में रहने वाले इन बंदियों ने जब इतनी मोटी रकम देने में असमर्थता व्यक्त की तो जेल प्रशासन के अधिकारियों ने इन बंदियों को दबाव बनाने के लिए भंडारे में भेज दिया। सूत्रों की माने तो भंडारे में इन बंदियों से इस कदर काम कराया जा रहा है कि कई बंदियों के हाथ में छाले तक पड़ गए हैं। जेल प्रशासन के उत्पीड़न का यह आलम है कि बंदियों का जीना मुहाल हो गया है। बताया गया है जेल में बंदियों के राशन में बेतहाशा कटौती, हाता, मशक्कत, बैठकी, वीआईपी बैरेक में जाने के लिए मोटी रकम वसूल करके प्रतिमाह लाखों रुपए के वारे न्यारे कर जेल अधिकारी जेब भरने में जुटे हुए हैं। उधर इस संबंध में जब वाराणसी जेल परिक्षेत्र के DIG राजेश कुमार श्रीवास्तव से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन ही नहीं उठा। जौनपुर जेल अधीक्षक पवन त्रिवेदी ने लगाए गए आरोपों को सिर्फ नकारते हुए किए गए सवालों का कोई भी जवाब देने से बचते नजर आए।
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मुख्यालय में सेटिंग गेटिंग कर जौनपुर जेल पहुंचे प्रोन्नत अधीक्षक
जौनपुर जेल अधीक्षक दीपांकर भारती को मध्य सत्र में हटवाकर प्रोन्नति जेल अधीक्षक पवन त्रिवेदी नैनी केंद्रीय कारागार से जौनपुर जेल पहुंचे। शासन और कारागार मुख्यालय में सेटिंग गेटिंग कर जौनपुर जेल पहुंचे जेल अधीक्षक के बंदियों के उत्पीड़न की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो दूध का दूध पानी सामने आ जाएगा। सूत्रों की माने तो शासन और मुख्यालय में मोटी रकम देकर जौनपुर जेल पहुंचे जेल अधीक्षक ने लूट मचाना शुरू कर दिया। यह मामला इसका जीता जागता उदाहरण है। अभी हाल ही में महानिदेशक कारागार ने ललितपुर जेल से मोबाइल के माध्यम से बंदी के धमकी दिए जाने के मामले में जेलर, डिप्टी जेलर को निलंबित किया। इस कड़ी कार्यवाही के बाद भी जेल अधिकारी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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