- चीनी मिलों के स्पेयर पार्ट की खरीद फरोख्त में की करोड़ों की धांधली
- चीनी मिल संघ से सेवानिवृत अफसर को पुनः नियुक्ति देने की शासन को भेजी फाइल
नया लुक संवाददाता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ के सेवानिवृत्त प्रधान प्रबंधक ( तकनीकी) को सहकारी चीनी मिलों को आवंटित बजट में करोड़ों का गोलमाल करने वाले अफसर को संविदा पर पुनः प्रधान प्रबंधक बनाने की तैयारी है। यह बात सुनने और पढ़ने में भले ही अटपटी लगे लेकिन दस्तावेज इस सच की पुष्टि करते नजर आ रहे हैं। संघ के प्रबंध निदेशक ने इस करोड़ों के घोटालेबाज अफसर को संविदा पर रखे जाने की पत्रावली को अनुमोदन के लिए अपर मुख्य सचिव चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग को भेजा है। अनुमोदन मिलते ही इन्हें नियुक्ति देने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
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सूत्रों से मिली जानकारी की मुताबिक सहकारी चीनी मिल संघ में तैनात प्रधान प्रबंधक (तकनीकी) विनोद कुमार 31 अगस्त 2025 को सेवानिवृत हो गए। चीनी मिल संघ की सेवाओं में रहने वाले इस अधिकारी ने सेवानिवृत्त होने से पूर्व 2017 से लगातार प्रधान प्रबंधक तकनीकी एवं क्रय दोनों पदों पर कब्जा जमाए रखा। विवादों में रहने वाले रहे प्रधान प्रबंधक विनोद कुमार ने अपनी भ्रष्ट कार्यशैली से 2017 से 2025 तक सभी प्रबंध निदेशक एवं शासन के चहेते अफसर बने रहे।
सूत्रों का कहना है कि चीनी मिलों को मरम्मत रखरखाव के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का बजट आवंटित किया जाता है। इस आवंटित बजट में उन्होंने करोड़ों रुपए का गोलमाल किया। सहकारी चीनी मिलों को शासन के निर्धारित चार रुपए प्रति क्विंटल गन्ना पेराई के सापेक्ष प्रधान प्रबंधक (तकनीकी ) ने 10-15 रुपए प्रति क्विंटल गन्ने पेराई का बजट आवंटित कर सहकारी चीनी मिलों और चीनी मिल संघ को करोड़ों रुपए का चूना लगाया और अपनी जेब भरकर सेवानिवृत्त हो गए। संघ के प्रबंध निदेशक और संयुक्त प्रबंध निदेशक की नाक के नीचे हुआ करोड़ों का घोटाला हो गया। शासन और संघ में बैठे आला अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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सूत्र बताते है कि तत्कालीन प्रबंध निदेशको ने चीनी मिलों को मरम्मत रखरखाव का बजट का अनुमोदन करते समय शासन के बनाए नियमों का जमकर खुला उल्लंघन किया। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही शासन ने सहकारी चीनी मिलों में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के उद्देश्य से ही निजी चीनी मिलों की तरह सहकारी चीनी मिलों में मशीनरी मरम्मत एवं रखरखाव के लिए चार रुपए प्रति क्विंटल गन्ना पेराई के बजट आवंटन का फॉर्मूला निर्धारित किया था।
प्रधान प्रबंधक तकनीकी विनोद कुमार ने शासन के बनाए गए सभी नियमों को धता बताकर आवंटित बजट में करोड़ों रुपए का गोलमाल किया। मिली जानकारी के अनुसार पूंजीगत मद मे भी मशीनरी मरम्मत के आइटम को स्वीकृत करके किया करोड़ों रुपये का घोटाला करने वाले प्रधान प्रबंधक तकनीकी के कार्यकाल की शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो दूध का दूध पानी का पानी सामने आ जाएगा। सेवानिवृत्त प्रधान प्रबंधक तकनीकी विनोद कुमार अपने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए संविदा पर पुनः प्रधान प्रबंधक तकनीकी के पद पर तैनाती कराने की जुगत में लगे हुए हैं। दिलचस्प तो यह है कि इस भ्रष्ट अधिकारी की पुनः नियुक्ति के लिए प्रबंध निदेशक ने फाइल को अनुमोदन के लिए शासन को भेज रखा है। उधर इस संबंध में संघ के प्रबंध निदेशक कुमार विनीत और एसीएस गन्ना वीना कुमारी मीणा से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
