- धान की फसल अर्थात धनलक्ष्मी का आगमन
- धन तेरस दीपावली नये व्यवसाय शुरु करने का उत्तम मुहूर्त
- श्रीराम लंका विजय कर अयोध्या धाम आए,
- दीप जलाकर,मंगल कलश रख कर, घर घर तोरन सजाकर मनाई गई खुशियां
- तंत्र म़त्र साधना की रात है दीपावली
- स्थिर लग्न मे होती है लक्ष्मी गणेश कुबेर की पूजा

धान की फसल घर मे आती है,तो दीपावली का पर्व मनाया जाता है। कहते है “धन धान्य का आना” अर्थात महालक्ष्मी का घर मे आगमन का यह पर्व है। इसलिए दीपावली का पर्व अष्ट महालक्ष्मी के आगमन का पर्व हे,इसके बाद पड़ने वाली एकादशी को श्रीहरि विष्णु की देवोत्थानी एकादशी आती हे। तब गन्ने के रस का प्राशन किया जाता है। श्रीहरि अपनी चिरसंगिनी महालक्ष्मी का घर घर मे निवास हो, यही सभी लोगों की मनोकामना होती है। खेती प्रधान देश मे फसल का होना सबसे अधिक खुशहाली का कारण रहा है। इसीलिए हर फसल आने पर हम उत्सध मनाते हैं। दीपावली का पर्व इसलिए भी महत्वपूर्ण है,श्रीरम लंका विजय के बाद भगवती सीता को लेकर लक्षृमण के साथ अयोधवया आए तो उनके गगमन पर घर घर दीप जले,दरवाजो पर मंगल कलश रखे ग ए,बंदनवार सजागे गए,खुशियो के पटाखे छूटे। दीपावली पर सूरन( ओल) की सब्जी या चोखा जरूर खाया जाता है,क्यों कि यह रक्त शोधन के साथ उदर विकार दूर करता हे।

किसान की खेत की फसल घर मै आती है,तो उसे बेंच कर विवाहादि के लिए धन एकत्र करता हे। व्यापारी अमावस्या की रात मे स्थिर मुहूर्त मे महालक्ष्मी,गणेश, कुबेर और हनुणान जी के पूजन के साथ सुरक्षा भी मांगता है। रात मे लक्ष्मी गणेश कुबेर काली सरस्वती और कुबेर की पूजा होती है। नये बहीखाते कापूजन कर उसका प्रयोग शुरु करते हैं। धनिया,हल्दी की गा़ठ,कमल गट्टा,मजीठ,चांदी का सिक्का और कौड़ी की पोटली बना कर रात भर महालक्ष्मी के चरणो ये रख ठल भोर मे तिजोरी मे रखते हैं। मान्यता है इससे अष्टलक्ष्मी की कृपा मिलती है। धन धान्य की साल भर कमी नही रहती तांत्रिक और मांत्रिक इस पवित्र रात मे साधना कर मंत्र सिद्ध करते है। विद्यार्थी अपनी समस्त पुस्तको के अंश षढ़ कर देवी सरस्वती का अनुग्रह प्राप्त करते हैं। संगीत कार अपना संगीत जगाते हैं। दीपावली की रात एक खास रात हौती है। तुला राशि मे सूर्य बुध चंद्रमा मंगल सभी आजाते हैं। इसलिए बिजनेस के लिए प्रबल मुहूर्त होता है। इस रात काजल पारा जाता है। जिससे नेत्रो की ज्योति मंद नहीं होती और उसका टीका लघादेने से टोना टोटका नहीं लघता। धनतेरस और दीपावली को नये व्यवसाय को शुरु करने का सर्वाधिक शुभ मुहूर्त माना जाता है।
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नरक चतुर्दशी कौ यम को दीपदान
- चतुर्दशी की रात मे सांझ होते ही दक्षिण दिशा मे चतुर्वर्ती जला कर यम कौ दीपदान करते हें। मान्यता के अनुसार इससे परिवार मे अपमृत्यु नही होती। यमलोक मे पड़ी मृतात्माये़ प्रसन्न होती हैं।
- चतुर्दशी को सायंकाल हनुमत उपासना कर हनुमान जयंती मनाई जाती है। भक्त हनुमान से परिवार धन संपदा की रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
- दीपावली की रात लोग जागरण कर महालक्ष्मी के आगमन की प्रतीक्षा करते हैं। तराजू,बाट,बहीखाता,कलम दावात सबकी पूछा होती है। लोग घर का दरवाजा खुली रखतै हैं। दूसरे दिन गले मिल कर एक दूसरे को बधाई देते हैं।
