विजयादशमी आज है, जानिए पूजन विधि व दशहरा का धार्मिक महत्व

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राजेन्द्र गुप्ता, ज्योतिषी और हस्तरेखाविद 

हिंदू धर्म में दशहरा को प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को ये पर्व मनाया जाता है, जो शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ होता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान राम ने रावण और मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। इस दिन लोग एक-दूसरे के गले लगकर दशहरा की शुभकामनाएं देते हैं। इसके अलावा देशभर में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाकर बुराई के नाश का उत्सव मनाते हैं। कई साल बाद ऐसा हो रहा है कि रावण दहन के समय पंचक या फिर भद्रा का साया नहीं रहेगा। इस साल दशमी तिथि दो दिन होने के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि किस दिन रावण दहन करना शुभ होगा।

दशहरा कब है?

ज्योतिष पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 1 अक्टूबर 2025 को शाम 7 बजकर 2 मिनट पर आरंभ हो रही है, जो 2 अक्टूबर शाम को 7 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में दशहरा का त्योहार 2 अक्टूबर, 2025 गुरुवार को मनाया जाएगा।

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दशहरा में पंचक और भद्रा का साया

रावण दहन पंचक या फिर भद्रा में करना अशुभ माना जाता है। इस साल ये दोनों ही रावण दहन के समय नहीं लग रहे हैं। 2 अक्टूबर को पूरे दिन भद्रा नहीं रहेगी। 3 अक्टूबर को सुबह 06:57 बजे से आरंभ होगी। वहीं पंचक की बात करें, तो अक्टूबर माह के पंचक 3 तारीख से ही आरंभ हो सकते है।

दशहरा का धार्मिक महत्व

दशहरा का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा और प्रेरणादायक है। यह पर्व अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक माना जाता है और हिंदू धर्म में इसकी विशेष धार्मिक मान्यता है। मान्यताओं के अनुसार, दशहरा के दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था और मां दुर्गा ने महिषासुर का संघार किया था। नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस से युद्ध किया और दशमी के दिन उसे पराजित किया। यह पर्व व्यक्ति को सदैव धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलाने के लिए अग्रसर करता है। ये पर्व विजय शक्ति, भक्ति और नारी सशक्तिकरण का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपने अंदर के अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों को नष्ट करने की प्रेरणा देता है। इसके अलावा दशहरा के दौरान शस्त्र पूजन की परंपरा निभाई जाती है।

विजयादशमी पूजन विधि

विजयादशमी के दिन प्रातः स्नान के बाद घर के देवस्थान को सजाकर भगवान श्रीराम और माता दुर्गा की पूजा करें। माँ दुर्गा को लाल पुष्प, चुनरी, श्रृंगार की वस्तुएँ और नारियल अर्पित करना शुभ माना जाता है। भगवान श्रीराम की पूजा कर उनके जीवन की आदर्श कथाओं का स्मरण करना चाहिए। इस दिन शमी वृक्ष का पूजन कर उसके पत्तों को तिलक लगाकर घर लाना शुभ माना जाता है। शस्त्र और वाहन को धोकर उन पर रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित कर दीपक जलाएँ। इससे घर और जीवन में विजय और मंगल की शक्ति बनी रहती है।

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