- कहा, हिंसक क्रांतियां कोई ठोस नतीजा नहीं लातीं
- डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को भी गलत ठहराया
- स्वदेशी और स्वावलंबन पर मोदी सरकार का रुख सही
नया लुक ब्यूरो
नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS ) के सरसंघचालक मोहन भागवत पिछले दिनों नेपाल हुए हुए ZEN Z के आंदोलन से सहमत नहीं हैं। संघ प्रमुख ने चेतावनी दी कि ऐसे आंदोलन सिर्फ “विदेशी शक्तियों को दखलंदाज़ी करने” का रास्ता देती हैं। उन्होंने कहा, “हिंसक विद्रोह से कुछ हासिल नहीं होता। वे केवल अराजकता फैलाते हैं। नेपाल में युवाओं की इस क्रांति को “अच्छा संकेत” नहीं मानते हुए भागवत ने कहा कि सरकार के साथ मतभेद हमेशा कानून के रास्ते से हल किए जाने चाहिए। मोहन भागवत संघ मुख्यालय में आरएसएस के शताब्दी समारोह के दौरान विजयदशमी के मौक पर वार्षिक संबोधन कर रहे थे।
उन्होंने अराजकता के व्याकरण को रोकने पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी हिंसक क्रांतियां कोई ठोस नतीजा नहीं लातीं। उन्होंने कहा कि अपनी नाराजगी को व्यक्त करने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल करने से किसी को कोई फ़ायदा नहीं होता, अब तक की सभी राजनीतिक क्रांतियों का इतिहास देखें, तो पता चल जाता है कि उनमें से किसी ने भी अपना उद्देश्य हासिल नहीं किया है।
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संघ प्रमुख ने अमेरिकी टैरिफ से असहमित जाताते हुए कहा कि कोई भी देश अलग-थलग नहीं रह सकता, लेकिन यह निर्भरता कभी बाध्यता में नहीं बदलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने नई टैरिफ नीति उनके अपने हितों को ध्यान में रखकर की गई है। लेकिन इससे सभी प्रभावित हो रहे हैं। दुनिया एक-दूसरे पर निर्भरता से चलती है। इसी तरह किसी दो देशों के बीच संबंध बनाए रखे जाते हैं। कोई देश अलगाव में जीवित नहीं रह सकता। उन्होंने स्वदेशी और स्वावलंबन पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया। भागवत का बयान पूरी दुनिया में कारोबारी तनाव के बीच भारत की आर्थिक नीतियों पर मोदी सरकार को एक महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

इस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और RSS एक दूसरे का खुलकर समर्थन कर रहे हैं और दोनों ने ही पुरानी तल्खियां भुला दी हैं। भागवत के विजयदशमी पर विचार सीधे प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्वदेशी’ अभियान से जुड़ते हैं। मोदी ने हाल के दिनों में वैश्विक चुनौतियों के बीच घरेलू उत्पादन और स्थानीय खपत को बढ़ावा देने का आह्वान किया था। आरएसएस प्रमुख का समर्थन इस अभियान को वैचारिक मजबूती मिलेगी खासकर जब अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंध तनावपूर्ण हो रहे हैं। यह बयान संघ परिवार और केंद्र सरकार के बीच आर्थिक नीतियों पर बढ़ती समझ को भी बता रहा है। नागपुर में आयोजित समारोह के दौरान आरएसएस के शताब्दी वर्ष के रूप में यह बयान संगठन की प्रासंगिकता को भी रेखांकित करता है। आरएसएस के इस रुख से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, और आगामी दिनों में सरकार की व्यापार नीतियों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
संघ प्रमुख का यह बयान न केवल आर्थिक नीतियों पर बल्कि भारत की विदेश नीति पर भी असर डाल सकता है। उन्होंने मित्र राष्ट्रों के साथ स्वैच्छिक कूटनीतिक संबंधों पर जोर दिया, जो न सिर्फ अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के बीच भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ रणनीति को मजबूत करता है बल्कि संगठन की प्रासंगिकता को भी रेखांकित करता है। भागवत ने नागपुर में संगठन के विजयादशमी उत्सव के अवसर पर ‘शस्त्र पूजा’ की। इस दौरान पारंपरिक हथियारों के अलावा, पिनाका एमके-1, पिनाका एन्हांस और पिनाका सहित आधुनिक हथियारों की प्रतिकृतियां और ड्रोन भी प्रदर्शित किए गए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़ंणवीस भी उपस्थित थे।
