शारदीय नवरात्रि: अष्टमी के दिन पूजा करने से मिलेगा अधिक लाभ…जानें कैसे

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राजेन्द्र गुप्ता, ज्योतिषी और हस्तरेखाविद

नवरात्र की अष्टमी तिथि विशेष महत्व रखती है, जिसे हम सभी महाष्टमी या दुर्गाष्टमी के रूप में जानते हैं। कई लोग इस दिन पर नवरात्र व्रत का पारण भी करते हैं और कन्या पूजन करते हैं।

कब है अष्टमी तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 सितंबर को दोपहर 4 बजकर 31 मिनट से हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 30 सितंबर को शाम 6 बजकर 6 मिनट पर हो रहा है। ऐसे में महाष्टमी मंगलवार 30 सितंबर को मनाई जाएगी।

मां महागौरी की आराधना

अष्टमी के दिन माता महागौरी की आराधना की जाती है। मां मातृत्व, आशीर्वाद और आध्यात्मिक शक्ति देने वाली देवी मानी जाती हैं। उनकी पूजा से भक्त भय और संकट से मुक्ति पाते हैं। माता को अन्नपूर्णा भी कहा जाता है, इसलिए इस दिन कन्याओं को भोजन करवा कर उनका सम्मान किया जाता है, जिससे घर में कभी अन्न की कमी न हो।

अष्टमी तिथि के दिन पूजा से मिलने वाले लाभ

अष्टमी तिथि, जिसे महाष्टमी या दुर्गा अष्टमी भी कहा जाता है, नवरात्र के नौ दिन विशेष रूप से पवित्र माने जाते हैं। इस दिन माता महागौरी की विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों को अनेक प्रकार के आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं।

भय और रोग से मुक्ति

माता महागौरी का आशीर्वाद भक्तों को भय, मानसिक तनाव और शारीरिक रोगों से मुक्ति दिलाता है। उनकी कृपा से जीवन में आने वाली कठिनाइयां, दु:ख और संकट कम होते हैं। भक्त मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ एवं सशक्त महसूस करते हैं।

बुद्धि और शक्ति में वृद्धि

माता महागौरी बुद्धि और बल प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। उनके आशीर्वाद से व्यक्ति जीवन के कठिन निर्णय आसानी से ले पाता है और मानसिक, शारीरिक तथा आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव करता है। इससे घर-परिवार और व्यवसायिक जीवन दोनों में सफलता और सकारात्मक बदलाव आते हैं। इस प्रकार अष्टमी तिथि का पूजा और व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह जीवन में शक्ति, सुरक्षा, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम भी बन जाता है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन माता महागौरी की उपासना करने से जीवन के सभी क्षेत्र में अनंत लाभ और कल्याण प्राप्त होता है।

महाष्टमी का महत्व

नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा की पूजा का विधान है। पौराणिक कथा के अनुसार, महाअष्टमी पर देवी दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था। इसलिए इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। इस दिन पर मां दुर्गा के आठवें रूप, महागौरी की पूजा-अर्चना का विधान है। कई साधक नवरात्र के 8वें दिन कन्या पूजन करते हैं। इस दौरान छोटी कन्याओं को देवी दुर्गा का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन करवाया जाता है। कन्याओं को विदा करते समय उन्हें उपहार या धन दिया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही माता रानी की कृपा से स्वास्थ्य, धन और आध्यात्मिक उन्नति का भी आशीर्वाद मिलता है। इतना ही नहीं किसी नए काम की शुरुआत के लिए भी नवरात्र की अष्टमी तिथि को बहुत ही शुभ माना गया है।

 

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