नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गंभीर आर्थिक संकट से घिरे भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (BPSL) के लिए JSW स्टील की 19,700 करोड़ रुपए की समाधान योजना को बरकरार रखते हुए उसके खिलाफ दायर अपीलों को शुक्रवार को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा तथा न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन की पीठ ने 17 फरवरी, 2020 को NCLAT द्वारा पारित फैसले पर मुहर लगा दी।
पीठ ने कंपनी में JSW स्टील द्वारा किए गए लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश पर गौर किया और BPSL के पूर्व प्रवर्तकों एवं कुछ लेनदारों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि उसे इन अपीलों में कोई दम नहीं लगता। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि JSW ने BPSL को लाभ कमाने वाली कंपनी बनाने में भारी निवेश किया है। उसे ऐसा करने के लिए उसे दंडित नहीं किया जा सकता।
पीठ ने अपने 136 पृष्ठों के फैसले में कहा कि सफल समाधान आवेदक (SRA) JSW ने इकाई (कॉर्पोरेट देनदार) के आधुनिकीकरण और विस्तार में भारी मात्रा में निवेश किया है। इतना ही नहीं, SRA-JSW द्वारा लागू की जा रही समाधान योजना के कारण कॉर्पोरेट देनदार के चालू व्यवसाय के रूप में चलने से हजारों कर्मचारी अपनी आजीविका कमा रहे हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि कार्यान्वयन में देरी JSW या ऋणदाताओं की समिति (COC) के कारण नहीं हुयी। दोनों ही बाधाओं के बावजूद योजना को लागू करने का प्रयास किया जा रहा था। शीर्ष अदालत की विशेष पीठ ने इस मामले में दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद 11 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। (वार्ता)
