लेह में जेन जेड और अरब स्प्रिंग स्टाइल में फैलाई गई हिंसा

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संजय सक्सेना

लेह-लद्दाख में हालिया हिंसक घटनाएं न केवल स्थानीय राजनीतिक सरगर्मियों को उजागर कर रही हैं, बल्कि चर्चित पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कांग्रेस के संभावित संबंधों, विदेशी हस्तक्षेप, और केंद्र सरकार से असंतोष के मुद्दों को भी सामने ला रही हैं। सोनम वांगचुक, लद्दाख क्षेत्र को राज्य का दर्जा दिलाने और छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जे की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे थे। उनकी भूख हड़ताल 10 सितंबर 2025 से शुरू हुई थी और कई नेताओं व प्रशासन के आग्रह के बावजूद वे अनशन पर डटे रहे। इस दौरान गिन-चुन कर चुने गए भाषणों में वांगचुक ने नेपाल के जेन जी मूवमेंट और अरब स्प्रिंग जैसे आंदोलनों का जिक्र किया और युवाओं को उससे प्रेरणा लेकर आगे आने को कहा। यही तथ्य केंद्र सरकार के मुताबिक हिंसा के पीछे प्रमुख कारण माना जा रहा है।

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हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और दर्जनों घायल हुए। पुलिस और प्रशासन के कार्यालयों सहित बीजेपी के दफ्तरों में भी तोड़फोड़ और आगजनी हुई। प्रशासन ने इलाके में कर्फ्यू लगा दिया है तथा CRPF, पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की तैनाती की है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वांगचुक अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार से मुलाकात करने वाले थे, उससे दो-तीन दिन पहले उन्होंने लद्दाख को हिंसा की आग में किस साजिश के तहत झोंक दिया। इस हिंसा के पीछे कांग्रेस की भूमिका को लेकर तीखे आरोप लगाए गए हैं। BJP का आरोप है कि स्थानीय कांग्रेस पार्षद फुंटसोग स्टैनजिन त्सेपाग ने सीधे तौर पर हिंसक घटनाओं का मार्गदर्शन किया। पुलिस ने इस मामले में FIR  दर्ज कर त्सेपाग को आरोपी बनाया है और कांग्रेस के संबंध को लेकर तस्वीरें, वीडियो भी जारी किए गए हैं। कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से नकारा है और सोनम वांगचुक भी अपने ऊपर लगे उकसावे के आरोपों का खंडन कर चुके हैं।

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सरकार और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों के अनुसार, आंदोलन के दौरान जब वांगचुक ने अपने भाषण में अरब स्प्रिंग और नेपाल के जेन-जेड आंदोलनों का उल्लेख किया, उससे आंदोलनकारी युवा वर्ग खास तौर पर प्रेरित हुआ। इस संदेश के चलते युवा प्रदर्शनकारियों ने आक्रोश में आकर सरकारी इमारतों, बीजेपी कार्यालयों और वाहनों पर हमला किया। जो भीड़ पहले शांतिपूर्वक अनशन स्थल पर थी, उसने बाद में हिंसक प्रदर्शन किए। इस पूरी प्रक्रिया को कुछ रिपोर्टों में सुनियोजित और योजनाबद्ध बताया गया है, जिसमें राजनीतिक प्रतिनिधियों के निजी स्वार्थों और साजिश की भी चर्चा हुई है। वैसे सोनम वांगचुक की छवि एक शिक्षावादी और पर्यावरण योद्धा की रही है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में उनकी राजनीतिक टिप्पणियां और बाहरी मंचों पर दिए गए भाषण चर्चाओं में रहे हैं। फरवरी 2025 में उनकी पाकिस्तान यात्रा पर भी सवाल उठे थे, जहाँ वे एक पर्यावरण सम्मेलन में शामिल हुए थे। उस यात्रा के दौरान रिकॉर्ड किए गए बयानों पर कई बार विवाद हुआ कि कहीं किसी देश-विदेश की प्रेरणा या संसाधनों की भूमिका तो नहीं। वांगचुक की ये जन जागरूकता-आधारित राजनीति अक्सर जोखिम भरी मानी जाती है क्योंकि वह बार-बार युवाओं से संगठित प्रतिरोध या गांधी के मार्ग की जगह अधिक आक्रामक रुख अपनाने की अपील कर चुके हैं।

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उधर  केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य प्रशासन इस हिंसा और उसके पीछे की संभावित विदेशी ताकतों की भूमिका को लेकर हर एंगल से जांच कर रहे हैं। सोनम वांगचुक की पाकिस्तानी संपर्कों वाली यात्रा, ‘अरब स्प्रिंग’ और ‘नेपाल-जेन-जेड’ आंदोलनों पर बार-बार जोर, और भीड़ के हिंसक हो जाने की तमीज़ को शक की नजर से देखा जा रहा है, लेकिन अभी तक प्रत्यक्ष विदेशी फंडिंग या दखल की पुष्टि नहीं हो सकी है, जबकि बीजेपी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिंसा के लिए कांग्रेस को उत्तरदायी बताते हुए स्थानीय पार्षद फुंटसोग स्टैनजिन त्सेपाग का नाम और सबूत मीडिया प्रमोशन में इस्तेमाल किए हैं। बीजेपी की तरफ से दावा किया गया कि कांग्रेस और इसके स्थानीय नेताओं ने युवाओं को खास दिशा में उकसाया जिससे स्थिति बेकाबू हुई। वहीं, कांग्रेस नेतृत्व ने इन दावों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए बीजेपी के खिलाफ साजिश की बात कही है।

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