हिंसक हुआ प्रदर्शन, प्रदर्शनकारियों ने BJP ऑफिस में लगाई आग, क्या है यह आंदोलन

Untitled 1 copy 56

लखनऊ। लद्दाख को पूर्ण राज्य और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में विरोध-प्रदर्शन हो रहा है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में पिछले 15 दिनों से हो रहा ये प्रदर्शन बुधवार को हिंसक हो गया। छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हो गई। प्रदर्शनकारी छात्रों ने CRPF की गाड़ी और बीजेपी ऑफिस में आग लगा दी। छात्र केंद्र सरकार से नाराज हैं और चाहते हैं उनकी मांग जल्द पूरी हो। छात्रों के उग्र होने पर सोनम वांगचुक ने कहा कि लेह में जो भी हुआ उसका दुख है। आज शांतिपूर्ण रास्ते पर चलने का मेरा संदेश नाकाम हो गया। मैं युवाओं से अपील करता हूं कि कृपया यह बकवास बंद करें। इससे हमारे उद्देश्य को ही नुकसान पहुंचता है। बता दें कि लद्दाख पहले जम्मू-कश्मीर का हिस्सा था। फिर पाँच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया। अब ऐसा क्या हुआ है कि लद्दाख संविधान की छठी अनुसूची में शामिल होना चाहता है? आइए जानते हैं कि संविधान की छठी अनुसूची क्या है और लद्दाख के लोग इसे इतना जरूरी क्यों मान रहे हैं?

केंद्र सरकार के फैसले से लद्दाख के लोग खुश थे। उन्हें लगा था कि स्वतंत्र केंद्र शासित प्रदेश से अब लद्दाख का विकास तेजी से होगा। लेकिन, धीरे-धीरे उनके सपने टूटने लगे। हर बात के लिए उन्हें केंद्र सरकार की ओर देखना पड़ रहा है। इसके लिए माध्यम के रूप में लेफ्टिनेंट गवर्नर और एक एमपी ही हैं। ऐसे में धीरे-धीरे लोग एकजुट हुए और अपने अधिकारों को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी की मांग है कि लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए। ऐसा होने पर लद्दाख की अलग तरह की स्वायत्ता होगी। संविधान के अनुच्छेद 244(2) और अनुच्छेद 275 (1) में विशेष व्यवस्था दी गई है। जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा होने पर लद्दाख के पास यह विशेष अधिकार था।

पूर्वोत्तर के कई राज्यों असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम में आज भी यह विशेष व्यवस्था लागू है। इसका फायदा यह है कि यहां इनका अपना प्रशासन है। इसे लागू होने के बाद खास इलाके में कामकाज को सामान्य बनाने के इरादे से स्वायत्त जिले बनाए जा सकते हैं। इनमें 30 सदस्य रखे जाते हैं। चार सदस्य राज्यपाल नामित करते हैं। बाकी स्थानीय जनता से चुनकर आते हैं। इन जिलों में बिना जिला पंचायत की अनुमति के कुछ नहीं हो सकता। यह सब तभी संभव है जब केंद्र सरकार इन्हें संविधान के मुताबिक यह अधिकार देगी।

केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में तो विधानसभा बची हुई है, लेकिन लद्दाख से विधायक नहीं चुने जाने का प्रावधान किया गया है। पहले यहां से चार एमएलए चुनकर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में लद्दाख का प्रतिनिधित्व करते थे। लोगों के आक्रोश का एक बड़ा कारण यह भी है। इनका आरोप है कि अब उनकी बात सरकार तक पहुंचाने का कोई उचित माध्यम नहीं है। सरकार ने जितने वायदे किए थे, सब बेदम साबित हुए। जब से नई व्यवस्था लागू हुई तब से सरकारी नौकरियों का संकट बढ़ गया है। पहले जम्मू-कश्मीर पब्लिक सर्विस कमीशन के मध्य से अफसरों की भर्तियां होती थीं तो लद्दाख को भी मौका मिलता था। आंदोलनकारियों का आरोप है कि बीते पांच साल में राजपत्रित पदों पर एक भी भर्ती लद्दाख से नहीं हुई है। गैर-राजपत्रित पदों पर छिटपुट भर्तियों की जानकारी जरूर सामने आई है। पर, लद्दाख में बेरोजगारी बढ़ी है। पढे-लिखे उच्च शिक्षित लोग छोटे-छोटे व्यापार करने को मजबूर हैं। बेहद कम आबादी होने की वजह से बिक्री न के बराबर होती है। दुकानें बंद करने की मजबूरी आन पड़ी है।

अगर केंद्र सरकार आंदोलनकारियों की मांगें मान लेती है तो लद्दाख में काफी कुछ बदल जाएगा। मांग है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्ज मिले, जिससे वे अपने लोगों के माध्यम से अपने हक की मांग कर सकें। लेह और कारगिल को अलग-अलग संसदीय क्षेत्र का दर्जा दिया जाए। स्वायत्त जिले बनाने का अधिकार मिलने के बाद जिला परिषद के पास असीमित अधिकार आ जाएंगे, जो अभी नहीं है। भूमि, जल, जंगल, कृषि, ग्राम परिषद, स्वास्थ्य, पुलिस जैसी व्यवस्था जिला परिषद को रिपोर्ट करेगी। यह कमेटी नियम-कानून बना सकेगी। यह सब होने के बाद काफी कुछ लद्दाख के हक में होगा। स्थानीय लोग अपने हिसाब से राज्य का विकास कर पाएंगे। फैसले ले पाएंगे। राज्य का दर्जा देने के अपने दावे को और मजबूत करने के लिए लद्दाख के नेताओं ने कहा कि यदि सिक्किम और मिजोरम को राज्य का दर्जा दिया जा सकता है, तो यही बात लद्दाख पर भी लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा, जब 1975 में सिक्किम को राज्य का दर्जा दिया गया था, तब इसकी आबादी लगभग दो लाख थी और इसका क्षेत्रफल 7,000 वर्ग किलोमीटर था। लद्दाख की आबादी तीन लाख से ज़्यादा है और इसका क्षेत्रफल 60,000 वर्ग किलोमीटर से ज़्यादा है। सामरिक दृष्टि से लद्दाख सिक्किम से ज़्यादा महत्वपूर्ण है।

Spread the love

WhatsApp Image 2026 08 08 at 9.21.41 PM
Crime News International

सोनौली सीमा पर कस्टम और एसएसबी को मिली बड़ी कामयाबी

नेपाल से भारत आ रही मिनी ट्रक से 13,620 किलो नीयारा जब्त चालक और खलासी गिरफ्तार उमेश चन्द्र त्रिपाठी महराजगंज। महराजगंज जिले के भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनौली में कस्टम विभाग और सशस्त्र सीमा बल की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने नेपाल से भारत आ रहे एक मिनी ट्रक से लगभग 13,620 […]

Spread the love
Read More
Pakistan-Türkiye-Saudi alliance
International

पाकिस्तान-तुर्किए-सऊदी की नई दोस्ती, क्या बदलने वाला है अमेरिका का दबदबा?

Pakistan-Türkiye-Saudi alliance : पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब के बीच हुआ नया रक्षा समझौता चर्चा में है। सात अगस्त को तीनों देशों ने एक आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे मक्का संयुक्त रक्षा समझौता बताया जा रहा है। इस समझौते ने क्षेत्रीय सुरक्षा […]

Spread the love
Read More
Meta Youth Mental Health
International Science & Tech

युवाओं की मेंटल हेल्थ पर भारी पड़ा Facebook-Instagram, Meta पर ₹9,030 करोड़ जुर्माना

Meta पर अमेरिकी कोर्ट का बड़ा एक्शन Meta Youth Mental Health Case: फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta को बच्चों और युवाओं की सुरक्षा से जुड़े मामले में अमेरिकी अदालत से बड़ा झटका लगा है। न्यू मैक्सिको की अदालत ने कंपनी पर कुल 942 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹9,030 करोड़ का जुर्माना लगाया है। […]

Spread the love
Read More