नवरात्रि के नौ दिनों में, मां दुर्गा को क्या भोग, लगाना चाहिए?

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ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र

नवरात्रि में प्रत्येक दिन देवी को उनके प्रिय भोग अर्पित करने से साधक की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। नवरात्रि में नौ दिनों तक ये भोग लगाने से मिलती है मां दुर्गा की अपार कृपा। सनातन हिंदू परंपरा में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र के दौरान साधक पूरी श्रद्धा भाव से व्रत रखते हैं और मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इन दिनों माता दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मनचाही इच्छाओं की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में हर दिन देवी को अलग भोग चढ़ाने का विधान है। व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए देवी को कुछ प्रिय भोग अर्पित करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं, नवरात्रि के नौ दिनों में किस दिन माता को क्या भोग अर्पित करना चाहिए।

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मां दुर्गा को लगाएं ये भोग

पहला दिन (मां शैलपुत्री)

नवरात्रि की शुरुआत मां शैलपुत्री की पूजा से होती है। मान्यता है कि इस दिन देवी को घी का भोग लगाने से साधक को सुख-सौभाग्य और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

दूसरा दिन (मां ब्रह्मचारिणी)

नवरात्र के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इन्हें मिश्री या चीनी का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इससे आयु लंबी होती है और साधक की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।

तीसरा दिन (मां चंद्रघंटा)

नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। देवी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें दूध से बनी मिठाई जैसे-खीर या बर्फी का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन से दुख और परेशानियां दूर होती हैं।

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चौथा दिन (मां कूष्मांडा)

नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की उपासना की जाती है। इस दिन उन्हें मालपुआ का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मां कुष्मांडा साधक को बुद्धि और विवेक का आशीर्वाद देती हैं।

पांचवा दिन (मां स्कंदमाता)

नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। इस दिन देवी को केले का भोग अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और संतान से जुड़ी चिंताएं दूर होती हैं।

छठा दिन (मां कात्यायनी)

नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की विशेष पूजा होती है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन देवी को शहद का भोग लगाने से वैभव और सम्मान की प्राप्ति होती है।

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सातवां दिन (मां कालरात्रि)

नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस दिन गुड़ या गुड़ से बनी चीजें अर्पित करने से भय और संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही, साधक पर देवी अपनी विशेष कृपा बरसाती है।

आठवां दिन (मां महागौरी)

नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा का विधान है। इस दिन नारियल या नारियल से बनी मिठाइयां अर्पित करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य मिलता है।

नौवां दिन (मां सिद्धिदात्री)

नवरात्रि के आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवी को हलवा-पूरी और चने का भोग लगाने से पूरे साल कार्यों में सफलता और सिद्धि मिलती है।

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