अतिक्रमण न हटाने पर सरयू ने लिखा विधानसभाध्यक्ष को पत्र, अवमानना की कार्रवाई करने की मांग

MLA Saryu RaiNayaLook
  • धनबाद के दरिदा में अतिक्रमण हटाने को लेकर आठ सितंबर तक कार्रवाई करने का मामला
  • सरयू राय का गंभीर आरोप, अतिक्रमणकारियों से मिला हुआ है धनबाद जिला प्रशासन

जमशेदपुर। जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने विधानसभाध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो को पत्र लिख कर धनबाद के उपायुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी और बाघमारा के अंचल अधिकारी के खिलाफ सदन की अवमानना एवं सभा-सदस्य के विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई आरंभ करने के संबंध में आग्रह किया है। विधानसभाध्यक्ष को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि षष्ठ्म झारखण्ड विधानसभा के तृतीय (मानसून) पूरक सत्र में दिनांक 28 अगस्त 2025 को उनके गैर सरकारी संकल्प के उत्तर में राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री ने सदन के समक्ष अंचल कार्यालय, बाघमारा के पत्रांक 1158, दिनांक 22 अगस्त 2025 का उद्धहरण देते हुए कहा था कि उपायुक्त धनबाद के प्रतिवेदन के अनुसार ‘‘मौजा-दरिदा, मौजा नं.- 120, खाता सं.- 271 की भूमि पर चाहरदिवारी कर अतिक्रमण किये गये भूमि से संबंधी मामले में अतिक्रमण वाद सं.-7/ 2024-25 दायर कर अभिलेख संधारित करते हुए अतिक्रमण की गयी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने हेतु आदेश पारित किया गया है।

सरयू राय के अनुसार, मंत्री ने सदन को बताया था कि अतिक्रमित भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने हेतु दिनांक 08 सितंबर 2025 की तिथि निर्धारित की गई है। अतिक्रमण हटाने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी, धनबाद से मजिस्ट्रेट तथा पुलिस बल-महिला बल सहित (सशस्त्र एवं लाठी पार्टी) की प्रतिनियुक्ति करने हेतु अनुरोध किया गया था। निर्धारित तिथि को प्रश्नगत भूमि को अतिक्रमण मुक्त करते हुए प्रतिवेदन अंतिम रूप से समर्पित कर दिया जाएगा। सरय़ू राय ने पत्र में लिखा है कि अभी तक अतिक्रमित भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए न तो सशस्त्र पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई और न ही अतिक्रमण हटाया गया है। यह विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए ठोस आश्वासन का उपर्युक्त विषयक अधिकारियों द्वारा उल्लंघन है और प्रश्न उठाने वाले सदस्य तथा सभा के विशेषाधिकार का हनन एवं सभा की अवमानना है।

सरयू राय ने पत्र में लिखा कि इसके पूर्व उन्होंने पंचम विधानसभा के मानसून सत्र में दिनांक 02 अगस्त 2024 को अल्पसूचित प्रश्न संख्या अ.सू.-05 द्वारा यह विषय सदन में उठाया था। इसके उत्तर में सरकार ने माना था कि उक्त स्थल में अतिक्रमण हुआ है। यह भी माना गया था कि ऊँची चाहरदीवारी से घेरकर दबंगों द्वारा कमजोर वर्ग के लोगों, जिनमें अनुसूचित जनजाति तथा अल्पसंख्यक रैयतों और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है और गैर-आबाद प्लॉट संख्या 1837, 1838, 1852, 1853 एवं 582 पर ईंट एवं सीमेंट की दीवार खड़ी कर दी गई है। धनबाद के उपायुक्त के प्रतिवेदन के अनुसार प्रसंगाधीन मामले में विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है, परन्तु कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

पत्र में सरयू राय ने लिखा है कि तदुपरांत दिनांक 07 मार्च 2025 को उन्होंने षष्ठ्म झारखण्ड विधानसभा के द्वितीय (बजट) सत्र में अल्पसूचित प्रश्न संख्या अ.सू.-36 द्वारा सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया। इस पर सरकार ने उनके प्रश्न का स्वीकारात्मक उत्तर दिया और सदन को बताया कि उक्त अतिक्रमित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने हेतु जिला स्तर से अतिक्रमण वाद संख्या- 07/2024-25, दिनांक 06 मार्च 2025 प्रारंभ करते हुए नोटिस निर्गत कर अतिक्रमण हटा देने की कार्रवाई आरंभ कर दिया गया है। इसके बाद प्रसंगाधीन मामले में उनके गैर सरकारी संकल्प की सूचना के उत्तर में दिनांक 28अगस्त 2025 को सरकार ने उत्तर दिया कि दिनांक 08सितंबर 2025 को अतिक्रमण हटा दिया जाएगा। इसके लिए अंचल कार्यालय, बाघमारा के पत्रांक 1158, दिनांक 22अगस्त 2025 द्वारा भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने हेतु दिनांक 08सितंबर 2025 की तिथि निर्धारित कर दी गई है और इसके लिए मजिस्टेªट तथा पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति करने हेतु अनुमंडल पदाधिकारी, धनबाद से अनुरोध किया गया है।

सरयू राय के अनुसार, दिनांक 08 सितंबर 2025 को प्रश्नगत भूमि से अतिक्रमण मुक्त करते हुए यह प्रतिवेदन अंतिम रूप से समर्पित कर दिया जाएगा परंतु दिनांक 08 सितंबर 2025 को अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई अंचल अधिकारी, बाघमारा एवं अनुमंडल पदाधिकारी, धनबाद तथा धनबाद पुलिस प्रशासन द्वारा नहीं की गई। सरयू राय ने आरोप लगाया कि इस मामले में धनबाद प्रशासन की आरोपी अतिक्रमणकारी के साथ मिलीभगत है और जिला प्रशासन जानबूझकर अतिक्रमण नहीं हटा रहा है। सरकार द्वारा इस मामले में सदन में दिये गए उत्तर से स्पष्ट है कि धनबाद जिला के उपायुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी और बाघमारा अंचल अधिकारी ने विधानसभा की अवमानना की है और सदस्य एवं सभा के विशेषाधिकार का हनन किया है। अतः उपायुक्त धनबाद, अनुमंडल अधिकारी, धनबाद एवं अंचल अधिकारी, बाघमारा के विरूद्ध सदन की अवमानना और सदस्य एवं सभा के विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई आरंभ करने की अनुमति दें।

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