दागदार अफसरों की कमेटी से कैसे होगी निष्पक्ष जांच!

आईजी
  • महिलाओं की प्रोन्नति पर महिला आयोग लेगा संज्ञान
  • हाइकोर्ट ने दिया प्रोन्नत कर्मियों को पदावनत करने का निर्देश
  • गंभीर आरोपों से घिरे डीआईजी मुख्यालय को सौंपी कमेटी की कमान

लखनऊ। नियम विरुद्ध तरीके से प्रोन्नति देने के मामले में प्रदेश कारागार विभाग को बड़ा झटका लगा है। हाइकोर्ट ने विभागीय अधिकारियों से प्रोन्नत वार्डर व हेड वार्डर निरस्त करने का आदेश देते हुए प्रोन्नति करने वाले अफसरों की जांच कर आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। न्यायालय के आदेश अनुपालन को लेकर कारागार मुख्यालय ने मामले की जांच के तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। इस कमेटी की कमान कई गंभीर आरोपों से घिरे डीआईजी मुख्यालय को सौंपी है। जांच कमेटी को लेकर विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि जो अधिकारी खुद कई मामलों में फंसा हुआ हो उससे निष्पक्ष जांच हो पाना संभव नहीं है।

मिली जानकारी के मुताबिक बीते दिनों विभाग में वार्डर से हेड वार्डर और हेड वार्डर से डिप्टी जेलर पद पर प्रोन्नत प्रक्रिया पूरी की गई। इस प्रक्रिया में दर्जनों की संख्या में वॉर्डर हेड वार्डर पद पर और हेड वार्डर महिलाओं को डिप्टी जेलर पद पर प्रोन्नत कर दिया गया। विभाग के अधिकारियों ने 10 प्रतिशत पदों को चिन्हित न कर आरक्षित मानते हुए प्रोन्नतियां प्रदान कर दी गईं। नियम विरुद्ध तरीके से हुई इस प्रोन्नति को लेकर धर्मेंद्र कुमार सिंह न्यायालय की शरण में चले गए। महिलाओं की प्रोन्नति से जुड़े इस मामले को लेकर चर्चा है कि महिला आयोग मामले को संज्ञान में लेकर दोषी अफसरों के खिलाफ कार्यवाही करेगा। न्यायालय ने तो प्रोन्नत प्रक्रिया को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि प्रोन्नति प्रदान करने संबंधी उत्तरदायी अधिकारियों/कर्मचारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित कर सात दिन आख्या उपलब्ध कराई जाए। उधर विभाग ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में महिलाकर्मियों को पदावनत करने की आख्या पेश कर दी है।

सूत्रों का कहना है कि इस निर्देश के बाद हरकत में आए कारागार मुख्यालय ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। इस कमेटी में शासन को कैदियों की समयपूर्व रिहाई के दो गलत प्रस्ताव भेजने के साथ अन्य कई मामलों के आरोपी डीआईजी मुख्यालय को अध्यक्ष, माफिया अतीक के जेल में अवैध सुविधाएं मुहैया कराने के आरोप में कई माह तक निलंबित रहे वरिष्ठ अधीक्षक और बजट आवंटन में खेल करने वाले लेखाधिकारी को सदस्य बनाया गया है। जांच कमेटी को लेकर विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि जो अधिकारी जांच में दोषी पाए गए इन अधिकारियों की जांच कितनी निष्पक्ष होगी यह एक बहुत बड़ा सवाल है। उधर कारागार मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने भी मामले में चुप्पी साध रखी है।

डीजी जेल ने कहा प्रोन्नत कमेटी पर भी होगी कार्यवाही

नियम विरुद्ध तरीके से किए गए जेलकर्मियों के प्रमोशन के संबंध में जब महानिदेशक कारागार पीसी मीणा से बातचीत की गई तो उन्होंने यह बात स्वीकार की कि हाईकोर्ट के निर्देशों का अनुपालन के तहत प्रोन्नत किए गए कर्मियों को पदावनत करने की आख्या न्यायालय को भेज दी गई है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रोन्नति प्रदान करने वाली कमेटी के पदाधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही करने को लिखा है। मामले की जांच के लिए मुख्यालय की ओर से गठित की गई दागदार कमेटी के सवाल को उन्होंने बड़ी सफाई से टाल दिया। कासगंज जेल में जेल अधीक्षक के बंदियों और जेलकर्मियों पर किए जा रहे उत्पीड़न के संबंध में डीजी जेल का कहना है कि इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए गए किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

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