- दबंगई के दम बड़ी वसूली, जहां चाहा वहां वहां घटना को दिया अंजाम
- जब चाहा पैरोल, फिर क्यों भागा ये सवाल हर किसी को बेचैन कर रहा है
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। सीरियल किलर भाईयों सलीम, रूस्तम और सोहराब सलाखों के पीछे रहकर भी उनका दबदबा जेल से लेकर बाहर तक माना जा रहा है। इनके रसूख पर गौर करें तो इन्होंने जब चाहा पैरोल पर रिहा हुए। काफी दिनों से इनके बारे में यही चर्चा है कि बाहर तो दूर इनकी हनक और दबंगई जेल के भीतर भी है।
सुख-सुविधा और हनक के बाद भी सोहराब पैरोल खत्म होने के बाद क्यों भाग निकलाॽ पैरोल से भागे अब हफ्ता भर होने को है, लेकिन पुलिस अभी तक सोहराब का कुछ सुराग नहीं लगा पाई। एसटीएफ को अब सोहराब के अलावा उसके एक दर्जन साथियों की भी तलाश है। जानकार बताते हैं कि एसटीएफ और जांच एजेंसियों को इनके बारे में सुराग तो मिले हैं, लेकिन ये हाथ नहीं लगे।
गौर करें तो ये घटनाएं किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। बात वर्ष 2004 की है रमजान महीने में सीरियल किलर भाईयों सलीम, रूस्तम और सोहराब के सबसे छोटे भाई शहजादे की राजधानी लखनऊ के हुसैनगंज क्षेत्र में बदमाशों ने हत्या कर दी। भाई की हत्या किए जाने की खबर मिलते ही तीनों भाइयों का ग़ुस्सा मानो सातवें आसमान पर पहुंच गया और भाई की हत्या का बदला लेने के लिए कसम खा ली।
यहीं आपराधिक इतिहास का अहम खेल शुरू हुआ। छोटे भाई शहजादे की हत्या का बदला लेने के लिए सीरियल किलर भाईयों सलीम, रूस्तम और सोहराब ने भाई कातिलों को महज़ एक घंटे के भीतर हुसैनगंज, और मड़ियांव क्षेत्र में जाकर ठीक उसी दिन भाई की मौत का बदला लिया, जब ठीक एक वर्ष पहले शहजादे को मौत की नींद सुलाया गया था। यही नहीं सीरियल किलर भाईयों ने वारदात को अंजाम देने से पहले तत्कालीन एसएसपी आशुतोष पाण्डेय को फोन पर धमकी देते हुए कहा कि भाई के खून का बदला लेने जा रहे हैं रोकना हो तो रोक लीजिए।
तत्कालीन एसएसपी आशुतोष पाण्डेय ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और कुछ ही देर में पुलिस को जानकारी हुई कि तीन लोगों की हत्या कर दी गई है। तब आनन-फानन में पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन इससे पहले सबकुछ हो चुका था। इसके बाद तीनों भाई अपराध जगत में छा गए। उनका न सिर्फ गैंग बना बल्कि धन्नासेठों से वसूली शुरू कर दी।
इन्होंने जेल में रहकर अपने भाई की हत्या का बदला लेने के लिए पूर्व पार्षद की अमीनाबाद में हत्या कराईं। वजीरगंज इलाके में दिनदहाड़े सरेराह समाज कल्याण विभाग के क्लर्क को मौत के घाट उतार दिया। जेल से लोगों को कॉल करके धमकाना और वसूली करना आम था। जेल में ऐशोआराम की एक क्लिप पिछले दिनों वायरल हुई थी। तीनों भाई जेल में खुद को महफ़ूज़ समझते थे फिर सोहराब की फरारी एक पहेली ही है।
