Naya Look की खबर का असरः मुख्यालय के बाबुओं ने लेनदेन कर जमकर कराए तबादले

  • दो माह पूर्व हरदोई भेजे गए वार्डर को भेजा सहारनपुर जेल
  • दर्जनों की संख्या में बार्डर और गृहजनपद की जेल भेजे गए वार्डर
  • दो साल के अंदर सेवानिवृत होने वाले कर्मियों को भी नहीं बख्शा

ए. अहमद सौदागर
लखनऊ। मनमाफिक जेलों पर तैनाती चाहिए तो कारागार मुख्यालय के बाबुओं मिलिए। यह बात कारागार मुख्यालय की जारी स्थानांतरण सूची में सच साबित हुई है। सूची में दो माह पूर्व स्थानांतरित किए गए वार्डर और हेड वार्डरो को मोटी रकम लेकर कमाऊ जेलों पर तैनात कर दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि दर्जनों की संख्या में जेलकर्मियों को गृहजनपद या फिर गृहजनपद के बार्डर की जेलों पर तैनात कर दिया गया है।

यही नहीं डेढ़ दो साल के अंदर सेवानिवृत होने वाले कर्मियों को भी स्थानांतरित कर दिया गया। ऐसा तब किया गया है जब शासन की स्थानांतरण नीति में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए है कि सेवानिवृत होने वाले कर्मियों का तबादला न किया जाए और निर्धारित समयावधि पूरी कर चुके कर्मियों को ही स्थानांतरित किया जाए। विभागीय कर्मियों में चर्चा है कि तबादला सूची की जांच कराई जाए तो सच खुद ही सामने आ जाएगा।

कारागार परिक्षेत्र कार्यालयों में लागू नहीं होती स्थानांतरण नीति!

सरकार की स्थानांतरण नीति के मुताबिक जनपद में तीन साल और मंडल में सात साल तैनात रहने वाले कर्मियों को स्थानांतरित किया जाए। इसके अलावा पति पत्नी को एक जनपद में तैनात किया जाए। सरकार के यह निर्देश कारागार विभाग के तबादलों की सूची में फाइलों में ही सिमट कर रह गया। विभाग में दर्जनों की संख्या में अधिकारी और कर्मचारी ऐसे है जो लंबे समय से एक ही जेल पर डेरा डाले हुए है। निर्धारित समयावधि पूरी होने के बाद भी इन्हें स्थानांतरित नहीं किया गया। विभाग में तबादलों का सबसे बड़ा खेल निजी अनुरोध पर होने वाले स्थानांतरण में किया गया। मोटी रकम लेकर कर्मियों को मनमाफिक कमाऊ जेलों पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

कारागार मुख्यालय के दो बाबू निलंबित, तबादलों और पत्रावली में गोलमाल करने के मामले में हुई कार्यवाही

सूत्रों का कहना है कि बीते दिनों सीतापुर जेल में तैनात एक वार्डर का तबादला श्रावस्ती जेल पर किया गया। स्थानांतरित वार्डर ने श्रावस्ती जेल पर ज्वॉइन किए बगैर ही अपना तबादला हरदोई जेल पर करा लिया। करीब दो माह पूर्व हरदोई जेल स्थानांतरित हुए इस वार्डर ने स्थानांतरण सत्र में अपना तबादला पश्चिम की कमाऊ वाली सहारनपुर जेल पर करा लिया। यह तो एक बानगी है। इसी प्रकार दर्जनों की संख्या में जेल के सुरक्षाकर्मियों ने मोटी रकम देकर अपना तबादला मनचाही (कमाऊ) जेलों पर करा लिया है। सूत्रों की माने तो मुख्यालय के बाबुओं ने पश्चिम की कमाऊ जेलों पर भेजे जाने के लिए एक से सवा लाख रुपए तक की मोटी रकम वसूल की है।

कारागार विभाग में स्थानांतरण नीति की उड़ी धज्जियां, तीन और छह माह पहले तैनात हुए अधीक्षकों को सौंप दी कमाऊ जेल

सामान्य जेलों के लिए 50 से 70 हजार रुपए तक लिए गए हैं। कुछ ऐसा ही हाल जेलर और डिप्टी जेलर संवर्ग में भी देखने को मिला। इस संवर्ग के अधिकारियों को मनचाही जेलों पर तैनात होने के लिए खासी जेब ढीली करनी पड़ी है। उधर इस संबंध में जब महानिदेशक पुलिस/महानिरीक्षक जेल पीवी रामा शास्त्री से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका और उनके पीआरओ अंकित का फोन नहीं उठा।

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मुख्यालय में अटैच जेलकर्मियों के माध्यम से हुए तबादले!

प्रदेश के विभिन्न मंडल की जेलों से कारागार मुख्यालय में अटैच वार्डर और हेड वार्डर के माध्यम से अधिकांश तबादले हुए हैं।इनके माध्यम कैंडिडेट मिलने के साथ दलाली तय होती है। सूत्रों के मुताबिक अटैच वार्डर जेल परिक्षेत्र स्थानांतरण के इच्छुक वार्डरों की सूची मंगाते है। फिर जेल के हिसाब से दाम तय होते हैं। इसके बाद पटल प्रभारी प्रशासनिक अधिकारी और संबंधित अधिकारियों से साठ गांठ करके उनका तबादला मनमाफिक जेल पर करा देते है।

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लेनदेन को लेकर दो बाबुओं में हुई भिडंत!

वार्डर और हेड वार्डर के तबादलों में लेनदेन को लेकर अधिष्ठान तीन के दो बाबुओं में जमकर भिडंत हो गई। अधिष्ठान तीन के प्रशासनिक अधिकारी और प्रधान सहायक के बीच हुई यह नोकझोक कर्मियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। चर्चा है कि सहायक का साला कर्मियों से तबादले के लिए सेटिंग गेटिंग करता था। इसी को लेकर दोनों बाबुओं में भिडंत हो गई थी। उधर मुख्यालय के अफसरों ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया।

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