उत्तर प्रदेश के पांचवे चरण की हमीरपुर लोकसभा का हाल

  • फिर लहराएगा भगवा, या फिर विपक्षी गठबंधन करेगा कमाल

लोकसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में भी माहौल बनता जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी जहां प्रदेश में 75 प्लस सीटें जीतने की योजना पर काम कर रही है तो विपक्षी दलों के गठबंधन IगकIइ में शामिल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. बहुजन समाज पार्टी भी अपनी चुनौती देने के लिए तैयार है. चित्रकूट धाम मंडल में पड़ने वाले हमीरपुर जिले में भी राजनीतिक हलचल बनी हुई है और यहां की संसदीय सीट पर अभी बीजेपी का कब्जा है. कुंवर पुष्पेंद्र सिह चंदेल लगातार 2 बार से हमीरपुर सीट से चुनाव जीत रहे हैं और उनकी नजर यहां से जीत की हैट्रिक लगाने पर है.
हमीरपुर जिला उत्तर में जालौन (उरई), कानपुर नगर और फतेहपुर जिले से तो पूर्व में बांदा जिला और दक्षिण में महोबा जिला तो पश्चिम में झांसी और जालौन से घिरा हुआ है. हमीरपुर में 4 तहसील हमीरपुर, मौदहा, राठ, सरीला तथा सात ब्लॉक गोहाण्ड, कुरारा, मौदहा, मुस्करा, राठ, सरीला और सुमेरपुर शामिल हैं. 2०11 की जनगणना के मुताबिक जिले की आबादी 1,०42,374 है. महोबा और चित्रकूट के बाद यह जिला उत्तर प्रदेश का तीसरा सबसे कम आबादी वाला जिला है. 2०11 की जनगणना के मुताबिक, हमीरपुर महोबा और चित्रकूट के बाद प्रदेश का तीसरा सबसे कम आबादी वाला जिला है. यहां पर यमुना और बेतवा दो अहम नदियां मिलती हैं. बेतवा नदी के किनारे पर ‘मोटे रेत’ पाए जाते हैं जिसकी उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में काफी मांग रहती है.
2०19 के चुनाव में क्या हुआ
हमीरपुर संसदीय सीट के तहत 5 विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें हमीरपुर, राठ, मौदहा, चरखारी और तिडवारी सीटें शामिल हैं. इसमें से राठ सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है. 2०22 के विधानसभा चुनाव में हमीरपुर संसदीय सीट के पांचों विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली थी. इससे पहले 2०17 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने यहां पर क्लीन स्वीप किया था.2०19 के लोकसभा चुनाव में हमीरपुर संसदीय सीट के चुनावी परिणाम की बात करें तो यहां पर कुल 14 उम्मीदवार मैदान में थे, जिसमें मुख्य मुकाबला बीजेपी के कुंवर पुष्पेंद्र सिह चंदेल और बहुजन समाज पार्टी के दिलीप कुमार सिह के बीच था. चुनाव से पहले सपा और बसपा के बीच चुनावी गठबंधन था जिसमें यह सीट बसपा के खाते में आई थी. कुंवर पुष्पेंद्र सिह चंदेल को 575,122 वोट मिले तो दिलीप सिह के खाते में 326,47० वोट आए थे. कांग्रेस के प्रीतम सिह लोधी को 114,534 वोट मिले. चुनाव में पुष्पेंद्र सिह चंदेल ने 248,652 मतों के अंतर से जीत हासिल की. तब के चुनाव में हमीरपुर सीट पर कुल 17,15,94० वोटर्स थे जिसमें पुरुष वोटर्स की संख्या 9,38,23० थी तो महिला वोटर्स की संख्या 7,77,678 थी. इसमें से कुल 1०,89,778 (64.4%) वोटर्स ने वोट डाले. नोटा के पक्ष में 15,155 वोट पड़े थे.
हमीरपुर का संसदीय इतिहास
हमीरपुर संसदीय सीट के राजनीतिक इतिहास को देखें तो यहां पर कांग्रेस को अब तक 6 बार जीत मिल चुकी है और उसके बाद बीजेपी का नंबर है. 1952 से यहां पर संसदीय चुनाव की शुरुआत हुई थी. तब के चुनाव में कांग्रेस के मनूलाल द्बिवेदी को जीत मिली थी. 1957 के चुनाव में वह फिर से विजयी हुए. इसके बाद 1962 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जीत की हैट्रिक लगाते हुए एक बार जीत हासिल की. हालांकि 1967 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा. भारतीय जनसंघ के स्वामी ब्रह्मानंद ने 54.1 वोट हासिल करके बड़ी जीत अपने नाम की.
कांग्रेस ने 1971 के चुनाव में फिर से वापसी की. स्वामी ब्रह्मानंद ने भारतीय जनसंघ को छोड़ दिया और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े तो इस बार भी वह विजयी हुए. इमरजेंसी के बाद 1977 में कराए गए चुनाव में लोकदल के तेज प्रताप सिह के खाते में जीत गई और सांसद चुने गए. 198० के संसदीय चुनाव में कांग्रेस ने फिर से हमीरपुर सीट अपने नाम किया और डूंगर सिह सांसद चुने गए. 1984 के चुनाव में भी यह सीट कांग्रेस के पास ही रही. स्वामी प्रसाद सिह सांसद बने. साल 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में जनता दल ने पहली बार हमीरपुर संसदीय सीट पर कब्जा जमाया. गंगाचरण राजपूत सांसद चुने गए.
मोदी लहर में बीजेपी की झोली में हमीरपुर
9० के दशक में देश में राम लहर का असर दिखा और बीजेपी को इसका खासा फायदा भी हुआ. 1991 के चुनाव में बीजेपी के टिकट से पंडित विश्वनाथ शर्मा ने चुनाव लड़ा और वह विजयी रहे. 1996 के चुनाव से पहले जनता दल छोड़ बीजेपी में आने वाले गंगाचरण राजपूत ने एक बार फिर यहां से जीत हासिल की. वह 1998 के चुनाव में भी बीजेपी के टिकट पर विजयी हुए. फिर 1999 के आम चुनाव में बसपा ने पहली बार यहां से जीत हासिल की. उसके प्रत्याशी अशोक सिह चंदेल ने जीत हासिल की. 2००4 के चुनाव में यहां से समाजवादी पार्टी का भी खाता खुल गया और राजनारायण बुधौलिया सांसद बन गए. 2००9 के चुनाव में बसपा ने दूसरी बार जीत हासिल की और उसके प्रत्याशी विजय बहादुर सिह को जीत मिली.
2०14 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की एंट्री हुई और देश में मोदी लहर का असर भी दिखा. बीजेपी के उम्मीदवार कुंवर पुष्पेंद्र सिह चंदेल ने सपा प्रत्याशी विशम्भर प्रसाद निषाद को 2,66,788 मतों के अंतर से हराते हुए चुनाव में जीत हासिल कर ली. बसपा तीसरे तो कांग्रेस चौथे स्थान पर खिसक गई थी. 2०19 के चुनाव में बीजेपी ने पुष्पेंद्र सिह चंदेल को फिर से उम्मीदवार बनाया और सपा-बसपा के साझा उम्मीदवार दिलीप सिह को 2,48,652 मतों के अंतर से हरा दिया. अब चंदेल यहां पर जीत की हैट्रिक की आस में हैं.
जातीय समीकरण
हमीपुर संसदीय सीट पर पिछड़ी बिरादरी के साथ-साथ क्षत्रिय और ब्राह्मण वोटर्स चुनाव के समीकरण को बिगाड़ने में सक्षम हैं. हालांकि पिछले 2 चुनाव में जीत तरह से जीत मिली है उससे यही लगता है कि यहां पर जातिगत समीकरण ज्यादा कारगर नहीं है. फिलहाल यहां पर 22 फीसदी से अधिक दलित वोटर्स हैं. इनके अलावा मल्लाह, ब्राह्मण और राजपूत वोटर्स की भी अच्छी संख्या है. मुस्लिम वोटर्स की संख्या 8 फीसदी से अधिक है.
चित्रकूट धाम मंडल में पड़ने वाले हमीरपुर जिले में भी लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल बनी हुई है. भारतीय जनता पार्टी की कोशिश न सिर्फ इस सीट को बचाए रखने की है बल्कि जीत की हैट्रिक लगाने पर भी है. वहीं विपक्षी दलों की ओर से इस सीट पर फिर से कब्जा जमाने की योजना बनाई जा रही है. समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया. पार्टी ने चरखारी से पूर्व विधायक के पुत्र अजेंद्र सिह राजपूत को प्रत्याशी घोषित किया है. अजेंद्र सिह राजपूत मूलरूप से महोबा जिले के ग्राम कनकुआ के रहने वाले हैं और उनका नाता लोधी (राजपूत) बिरादरी से हैं. वहीं बहुजन समाज पार्टी भी अपनी ओर से कड़ी चुनौती पेश कर सकती है. संसदीय क्षेत्र में शुरू से अब तक हुए आम चुनाव के नतीजे पर नजर डाले तो यहां की सीट पर कांग्रेस ने हैट्रिक लगाई है। वर्ष 1952 के लोकसभा चुनाव में एलएल द्बिवेदी ने जीत का परचम फहराया था। उन्हें उस जमाने में 32.7 प्रतिशत वोट मिले थे। एमएल द्बिवेदी वर्ष 19957 के लोकसभा चुनाव दोबारा सांसद बने थे। उन्हें 28.6 फीसदी मत मिले थे। वर्ष 1962 के लोकसभा चुनाव में एमएल द्बिवेदी ने तीसरी बार कांग्रेस का मान रखते हुये जीत का परचम फहराया था। उन्हें 47.9 फीसदी वोट मिले थे। वर्ष 1967 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ पार्टी ने यहां की सीट पर कब्जा कर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस को बाहर कर दिया था। भाजसं प्रत्याशी स्वामी ब्रह्मानंद को 54.1 फीसदी मत मिले।
कांग्रेस ने लगातार तीन जीत हासिल की
वर्ष 1971 के लोकसभा चुनाव में स्वामी ब्रह्मानंद ने भारतीय जनसंघ पार्टी छोड़ कांग्रेस के टिकट से अपनी किस्मत आजमाई औैर दोबारा जीत कर वह लोकसभा पहुंचे। उन्हें 52.० प्रतिशत मत मिले। वर्ष 1977 के आम चुनाव में बीएलडी के प्रत्याशी तेज प्रताप सिह ने पहली बार हमीरपुर संसदीय सीट पर जीत का परचम फहराया। उन्होंने सर्वाधिक 54.1 प्रतिशत मत हासिल किए। वर्ष 198० के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर बाजी मारी। कांग्रेस प्रत्याशी डूंगर सिह ने 44.2 प्रतिशत मत पाया। वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने दोबारा सीट पर कब्जा जमाया। स्वामी प्रसाद सिह ने जातीय समीकरणों के कारण 52.6 फीसदी मत हासिल किये।
1989 में पहली बार जनता दल ने जमाया कब्जा
वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव पहली बार जनता दल ने हमीरपुर महोबा संसदीय सीट पर कब्जा किया। जनता दल प्रत्याशी गंगाचरण राजपूत ने 42.9 प्रतिशत मत हासिल किये। अयोध्या में रामजन्म भूमि के मुद्दे पर भाजपा की पूरे देश में लहर चली और 1991 के लोकसभा चुनाव में पंडित विश्वनाथ शर्मा ने भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ा और 24.5 फीसदी मत हासिल कर यहां की सीट पर जीत दर्ज करायी।
1998 में तीसरी बार भाजपा ने जीत हासिल की
वर्ष 1996 के आम चुनाव में जनता दल छोड़ भाजपा में आए गंगाचरण राजपूत ने भारी मतों से जीत दर्ज की। भाजपा प्रत्याशी को 39.72 प्रतिशत मत मिले। वर्ष 1998 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तीसरी बार सीट पर कब्जा किया। भाजपा प्रत्याशी गंगाचरण राजपूत को 35.1 प्रतिशत मत मिले।
1999 में बसपा ने जमाया रंग
वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में पहली बार बसपा ने जातीय समीकरणों के उलटफ़ेर से यहां की सीट पर जीत का परचम फहराया। बसपा प्रत्याशी अशोक सिह चंदेल ने 34.99 प्रतिशत मत पाये। वर्ष 2००4 के लोकसभा चुनाव में पहली बार समाजवादी पार्टी ने हमीरपुर-महोबा संसदीय सीट पर कब्जा किया। सपा प्रत्याशी राजनारायण बुधौलिया ने 36.5 प्रतिशत मत हासिल किये। 2००9 में बसपा से विजय बहादुर सिह तथा 2०14 में भाजपा से पुष्पेन्द्र सिह चंदेल चुने गए वर्ष 2०14 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी की लहर पूरे देश में चली जिसमें भी दल इधर उधर बिखर गये। पुष्पेन्द्र सिह चंदेल, भाजपा के टिकट से पहली बार चुनाव लड़े और कांग्रेस प्रत्याशी सिद्ध गोपाल साहू को कड़ी चुनौती देते हुये जीत का परचम फहराया। उन्हें 453884 मत मिले जबकि सपा प्रत्याशी विशम्भर प्रसाद निषाद को 187०96 मत मिले। 176356 मत पाकर तीसरे स्थान पर रही जबकि कांग्रेस 78229 मत पाकर चौथे स्थान पर चली गई।
भाजपा ध्वस्त कर चुकी है कांग्रेस का गढ़
वर्ष 1952 से लेकर 1962 तक हमीरपुर महोबा संसदीय सीट पर लगातार कांग्रेस का कब्जा रहा है। लेकिन 1991 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के मजबूत गढ़ को ध्वस्त कर यहां की सीट पर कब्जा कर लिया था। वर्ष 1991 से लेकर 1998 तक भाजपा लगातार सीट पर काबिज रही है। कांग्रेस की तरह भाजपा ने भी हैट्रिक लगायी है। संसदीय सीट के शुरू से लेकर अब तक हुये चुनावों की नतीजों पर नजर डाले तो कांग्रेस के खाते में छह बार यहां की सीट गई है जबकि भाजपा ने पांच बार जीत दर्ज करायी है।
आठ बार सवर्ण उम्मीदवारों को मिली जीत
इस संसदीय क्षेत्र में सर्वाधिक आठ बार पिछड़ी जाति के प्रत्याशी चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे है। वहीं आठ बार सवर्ण जाति के प्रत्याशी भी संसदीय सीट पर विजय श्री हासिल कर चुके है। वर्ष 1952 से लेकर 1962 तक एमएल द्बिवेदी कांग्रेस से लोकसभा सदस्य रहे है जबकि 1991 में विश्वनाथ शर्मा भाजपा के टिकट से सांसद बने थे। 1999 के लोकसभा चुनाव में अशोक सिह चंदेल बसपा से चुने गये थे वहीं 2००4 में सपा से राजनारायण बुधौलिया, 2००9 में बसपा से विजय बहादुर सिह तथा 2०14 में भाजपा से पुष्पेन्द्र सिह चंदेल चुने गए। इस लोकसभा क्षेत्र में साढ़े 17 लाख से अधिक मतदाता है। इनमें पिछड़ी, और क्षत्रिय ब्राह्मण मतदाता की एकजुटता से चुनाव के समीकरण गड़बड़ा जाते है। जातीय मतों पर नजर डाले तो 28 फीसदी दलित-मुस्लिम, नौ फीसदी, ब्राह्मण 14 फीसदी, यादव, लोधी, कुशवाहा सात-सात फीसदी व 13 फीसदी क्षत्रिय के अलावा अन्य बिरादरी के मत है।

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