Lucknow: उत्तर प्रदेश की सियासत में UGC नियमों को लेकर चल रही बहस अब विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बीच भी चर्चा का विषय बन गई है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भले ही छह सीटों पर जीत दर्ज की हो, लेकिन समाजवादी पार्टी (SP) ने पांच सीटें जीतकर सत्तारूढ़ दल को कड़ी चुनौती दी है। इन नतीजों के बीच सबसे अधिक चर्चा 53,615 अवैध मतों को लेकर हो रही है।
राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या UGC विवाद को लेकर युवाओं और मतदाताओं की नाराजगी भी इन नतीजों में कहीं दिखाई दी है?चर्चा है कि कुछ मतपत्रों पर मतदान करने के बजाय ‘UGC Roll Back’ लिखा गया था। हालांकि, ऐसे मतपत्रों की वास्तविक संख्या को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद इस मुद्दे ने चुनावी नतीजों को एक नई राजनीतिक बहस में बदल दिया है।
11 सीटों पर 53,615 वोट अवैध, करीब आठ फीसदी मत हुए रद्द
विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनाव में कुल 6,69,982 मत पड़े। इनमें से 6,16,367 वोट वैध पाए गए, जबकि 53,615 मतपत्र अवैध घोषित किए गए। यानी कुल मतदान का लगभग 8 फीसदी हिस्सा गिनती में शामिल नहीं हो सका। सीटवार आंकड़ों पर नजर डालें तो लखनऊ स्नातक सीट पर सबसे ज्यादा 11,233 मत अवैध घोषित हुए। वहीं वाराणसी स्नातक सीट पर 9,663 और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर 9,596 मत रद्द किए गए।
इसके अलावा आगरा स्नातक सीट पर 5,852, मेरठ स्नातक सीट पर 3,976, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट पर 3,183 और मेरठ शिक्षक सीट पर 2,809 वोट अवैध घोषित हुए। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर 2,800, आगरा शिक्षक सीट पर 2,128, वाराणसी शिक्षक सीट पर 1,439 और लखनऊ शिक्षक सीट पर 936 मत अमान्य पाए गए।
गोरखपुर में जीत के अंतर से नौ गुना ज्यादा अवैध वोट
चुनाव के नतीजों में गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट सबसे ज्यादा चर्चा में है। यहां जीत और हार का अंतर महज 307 वोट रहा, जबकि 2,800 मत अवैध घोषित किए गए। यानी अमान्य मतों की संख्या जीत के अंतर से करीब नौ गुना अधिक रही।
हालांकि, अवैध मतों को किसी एक पार्टी या प्रत्याशी के पक्ष में जोड़कर चुनावी नतीजों का आकलन नहीं किया जा सकता। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने मतपत्रों पर UGC के विरोध में संदेश लिखे गए थे। फिर भी इतने बड़े पैमाने पर मतों का अमान्य होना राजनीतिक बहस को हवा दे रहा है।
सपा का दावा- छह सीटों पर जीत सकता था विपक्ष
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक वाजपेयी ने दावा किया कि विपक्ष पांच सीटों के अलावा गोरखपुर की सीट भी जीत सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन-प्रशासन का इस्तेमाल कर सपा के यादव प्रत्याशी को करीब 300 वोटों से हरवाने का काम किया।
वाजपेयी ने कहा कि भाजपा ने UGC के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया, जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस विषय पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि पार्टी का सिद्धांत है कि दोषी बचना नहीं चाहिए और निर्दोष फंसना नहीं चाहिए। सपा प्रवक्ता ने दावा किया कि 2027 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनने पर लोगों को न्याय दिलाने का काम किया जाएगा।
कांग्रेस ने युवाओं की नाराजगी से जोड़ा मामला
कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने अवैध मतों की बड़ी संख्या को सरकार के खिलाफ युवाओं की नाराजगी से जोड़ते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार देने के वादे पूरे नहीं हुए हैं और प्रदेश में शिक्षकों के करीब डेढ़ लाख पद खाली हैं। उन्होंने 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े अभ्यर्थियों के संघर्ष और शिक्षामित्रों की समस्याओं का भी जिक्र किया। कांग्रेस प्रवक्ता के मुताबिक UGC का मुद्दा भी युवाओं और एक विशेष वर्ग के बीच नाराजगी की वजह बना है। उन्होंने UGC नियमों में संशोधन की जरूरत बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में अवैध वोट सरकार के प्रति असंतोष का संकेत हो सकते हैं।
क्या 2027 के चुनाव में भी दिखेगा असर?
विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा की छह सीटों पर जीत और सपा की पांच सीटों पर सफलता के बीच 53,615 अवैध मतों का आंकड़ा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या UGC विवाद, रोजगार और भर्ती से जुड़े मुद्दे युवाओं के बीच राजनीतिक असंतोष को बढ़ा रहे हैं? क्या इसका असर भाजपा के परंपरागत वोट बैंक पर भी पड़ सकता है? फिलहाल इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
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