
Prayagraj: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रयागराज के तेलियरगंज चौराहे पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा के सदस्य और पूर्व सांसद महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वह नोट कर लें कि देश की आजादी के लिए केवल पंडित जवाहरलाल नेहरू ही नहीं, बल्कि मसुरियादीन पासी भी जेल गए थे। उन्होंने कहा कि देश के लिए संघर्ष करने वाले महापुरुषों को सम्मान देना समाज और सरकार की जिम्मेदारी है।
मसुरियादीन पासी के नाम पर होगा चौराहा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महापौर से संबंधित प्रस्ताव तैयार करने को कहा। उन्होंने घोषणा की कि जिस चौराहे पर मसुरियादीन पासी की प्रतिमा स्थापित की गई है, उसका नाम उनके नाम पर रखा जाएगा। इसके साथ ही प्रयागराज की किसी उपयुक्त संस्था का नाम भी महाशय मसुरियादीन पासी के नाम पर रखने की बात कही।
CM योगी ने कहा कि महापुरुषों को सम्मान देकर ही समाज आगे बढ़ता है। अतीत के गौरव को सम्मान देने से वर्तमान मजबूत होता है और बेहतर वर्तमान से उज्ज्वल भविष्य का निर्माण होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
नौ साल तक जेल में रहे मसुरियादीन पासी
मुख्यमंत्री ने मसुरियादीन पासी के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश की आजादी के लिए लंबा संघर्ष किया। उनके अनुसार, मसुरियादीन पासी ने वर्ष 1932 से 1944 के बीच करीब नौ साल जेल में बिताए और रिहाई के बाद भी जन-जागरण का काम जारी रखा।
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CM योगी ने बताया कि मसुरियादीन पासी का जन्म दो अक्टूबर 1911 को हुआ था। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई ऐसे महापुरुषों को पर्याप्त स्थान नहीं मिला, जिन्होंने देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। भाजपा सरकार विकास के साथ विरासत और महापुरुषों की स्मृतियों को संजोने का काम कर रही है।
नेहरू के साथ संसद पहुंचे थे मसुरियादीन पासी
मुख्यमंत्री ने बताया कि मसुरियादीन पासी वर्ष 1946 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने। स्वतंत्रता के बाद वह 1952 से 1972 के बीच चार बार सांसद चुने गए। उन्होंने कहा कि वर्ष 1952 में पंडित जवाहरलाल नेहरू और मसुरियादीन पासी एक साथ संसद पहुंचे थे।
CM योगी ने ब्रिटिश शासन के दौरान लागू किए गए जरायम पेशा कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1871 में बने इस कानून के जरिए पासी सहित कई समुदायों को सामाजिक अपमान और भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर और मसुरियादीन पासी ने इस कानून के खिलाफ आवाज उठाई। इस कानून को समाप्त कराने का संघर्ष वंचित और दलित समाज को सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम था।
पासी समाज के शौर्य और बलिदान को किया याद
मुख्यमंत्री ने पासी समाज के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए महाराजा बिजली पासी, वीर मक्का पासी और वीरांगना ऊदा देवी के शौर्य और बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इन वीरों ने विदेशी आक्रांताओं और अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया तथा देश के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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CM योगी ने बताया कि लखनऊ में महाराजा बिजली पासी के किले के पुनरुद्धार का काम किया गया है। साथ ही वीरांगना ऊदा देवी के नाम पर पीएसी बटालियन गठित करने और उनकी भव्य अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने की योजना का भी उल्लेख किया।
सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले सभी महापुरुष सम्मान के अधिकारी हैं। किसी भी महापुरुष का सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं हो सकता। समाज के वंचित वर्गों की आवाज उठाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले लोगों को उचित स्थान मिलना चाहिए।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, प्रयागराज के महापौर उमेश चंद्र ‘गणेश केसरवानी’, फूलपुर सांसद प्रवीण पटेल, विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस अवसर पर मसुरियादीन पासी की पुत्री कमला कुमारी और पौत्र सचिन कुमार समेत कई गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।
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