कैसा होगा कलयुग का अंत?

Lucknow

भगवान विष्णु के कल्कि अवतार को लेकर धार्मिक मान्यताओं में वर्णित हैं कई रहस्य

Lucknow: हिंदू धर्म के शास्त्रों में चार युगों—सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग—का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रत्येक युग की अपनी विशेषताएं हैं। कलयुग को ऐसा समय माना गया है, जिसमें धीरे-धीरे धर्म, सत्य और नैतिक मूल्यों का ह्रास होता है। इसी संदर्भ में कलयुग के अंत और भगवान विष्णु के दसवें अवतार भगवान कल्कि को लेकर अनेक धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं।

क्या कल्कि अवतार हो चुका है? जानिए, भविष्य मालिका क्या कहती है।

कलयुग के अंत में होगा कल्कि अवतारहिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार कल्कि का प्राकट्य कलयुग के अंत में होगा। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित मान्यता के मुताबिक, जब संसार में अधर्म, अन्याय और पाप अपने चरम पर पहुंच जाएंगे, तब भगवान कल्कि अवतार लेकर दुष्टों का विनाश करेंगे और धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे। इस अवतार को एक नए युग की शुरुआत से भी जोड़कर देखा जाता है।

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कौन है कलि पुरुष?

धार्मिक परंपराओं में कलि पुरुष को कलयुग में अधर्म और बुराइयों का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि जैसे-जैसे समाज में लोभ, मोह, छल, हिंसा और अन्याय बढ़ेंगे, वैसे-वैसे कलयुग का प्रभाव गहरा होता जाएगा। हालांकि, कलि पुरुष की उत्पत्ति और उसके स्वरूप से जुड़ी अलग-अलग धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं।

सात चिरंजीवियों की भूमिका

पौराणिक मान्यताओं में सात चिरंजीवियों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें अमर अथवा दीर्घजीवी माना जाता है। इनमें अश्वत्थामा, राजा बलि, वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम के नाम प्रमुख हैं। कुछ धार्मिक परंपराओं में भगवान कल्कि के साथ चिरंजीवियों के सहयोग से धर्म की स्थापना होने की मान्यता भी व्यक्त की गई है।

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कलयुग के बाद सतयुग की शुरुआत

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलयुग का अंत होने के बाद एक नए सतयुग का आरंभ होगा। इसे सत्य, धर्म, शांति और सदाचार की पुनर्स्थापना का प्रतीक माना जाता है। इस प्रकार कल्कि अवतार की कथा केवल अधर्म के अंत की कल्पना नहीं, बल्कि धर्म की विजय और एक नए युग के आगमन का संदेश भी देती है। यह विवरण पौराणिक मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं पर आधारित है। कलयुग के अंत की घटनाओं और उनके समय को लेकर कोई प्रमाणित वैज्ञानिक भविष्यवाणी उपलब्ध नहीं है।

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