
राष्ट्रपति मुर्मु ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में 66वें राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय पाठ्यक्रम के शिक्षकों और प्रतिभागियों से मुलाकात के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और प्रौद्योगिकी का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। ऐसे में देश को नई चुनौतियों के अनुरूप अपनी तैयारी मजबूत करने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाने की आवश्यकता है।
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साइबर और अंतरिक्ष सुरक्षा पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में युद्ध के नए तरीके सामने आ रहे हैं। इन परिस्थितियों में बेहतर तैयारी, दूरदर्शिता और बदलते हालात के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं रह गई है। आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी क्षमता, नवाचार और विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग भी जरूरी है।
वैज्ञानिक संस्थानों और सेना के बीच सहयोग जरूरी
राष्ट्रपति मुर्मु ने वैज्ञानिक संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच करीबी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नए विचारों और तकनीकों को व्यावहारिक समाधान में बदलने के लिए अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कम लागत वाली ऐसी तकनीकों के महत्व का भी उल्लेख किया, जो उन्नत रक्षा प्रणालियों को सहयोग दे सकें और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करें। इस संदर्भ में उन्होंने अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना जैसी सरकारी पहलों का जिक्र किया।
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मजबूत अर्थव्यवस्था भी राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अर्थव्यवस्था का मजबूत होना भी आवश्यक है। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी परिस्थितियों से पैदा हुई बाधाओं का सामना करने की क्षमता का उल्लेख किया। साथ ही कहा कि भारत ने रणनीतिक फैसले लेने की अपनी स्वतंत्रता भी बनाए रखी है।
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