
New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने जयप्रकाश नारायण को भारतीय लोकतंत्र और सामाजिक न्याय का प्रबल समर्थक बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन आम नागरिकों को सशक्त बनाने और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए समर्पित कर दिया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कई पोस्ट के माध्यम से लोकनायक के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण भारत की सबसे निर्भीक आवाजों में से एक थे, जिन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और सामाजिक बदलाव के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संपूर्ण क्रांति के आह्वान ने जगाई सामाजिक-राजनीतिक चेतना
PM मोदी ने कहा कि जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति के आह्वान ने एक व्यापक सामाजिक आंदोलन को जन्म दिया। इस आंदोलन का उद्देश्य समानता, नैतिकता और सुशासन पर आधारित राष्ट्र का निर्माण करना था। उनके विचारों ने आम नागरिकों को व्यवस्था में बदलाव के लिए आगे आने की प्रेरणा दी।
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जयप्रकाश नारायण
प्रधानमंत्री के अनुसार, जयप्रकाश नारायण ने विशेष रूप से बिहार और गुजरात में कई जन आंदोलनों को प्रेरित किया। इन आंदोलनों के माध्यम से देशभर में सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता बढ़ी। इनका तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर भी व्यापक राजनीतिक प्रभाव पड़ा। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि इन जन आंदोलनों ने केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार को चुनौती दी, जिसके बाद देश में आपातकाल लागू किया गया। उन्होंने आपातकाल के दौर को भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में याद किया।
‘प्रिजन डायरी’ के पन्नों के जरिए याद किया संघर्ष
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने अभिलेखागार से उनकी पुस्तक ‘प्रिजन डायरी’ के कुछ दुर्लभ पन्ने भी साझा किए। यह पुस्तक आपातकाल के दौरान उनके अनुभवों और विचारों से जुड़ी है।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि इन पन्नों में एकांत कारावास के दौरान जयप्रकाश नारायण की पीड़ा के साथ-साथ लोकतंत्र के प्रति उनकी अटूट आस्था भी दिखाई देती है। उन्होंने पुस्तक में दर्ज जयप्रकाश नारायण के एक मार्मिक कथन को भी उद्धृत किया।
जयप्रकाश नारायण ने लिखा था, “भारतीय लोकतंत्र के ताबूत में ठोकी गई हर कील मेरे दिल में ठोकी गई कील के समान है।” यह कथन लोकतंत्र के प्रति उनके गहरे जुड़ाव और आपातकाल के दौरान देश की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर उनकी चिंता को दर्शाता है।
लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में जयप्रकाश नारायण की उस विरासत को रेखांकित किया, जिसने नागरिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और सुशासन से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में लाने में योगदान दिया।
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