MSMEs के लिए ‘कॉर्पोरेट मित्र’ पहल शुरू
New Delhi: देश के छोटे कारोबारियों और MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम पहल शुरू की है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने ‘कॉर्पोरेट मित्र’ कार्यक्रम की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य एमएसएमई के लिए कारोबारी और नियामकीय अनुपालन यानी कंप्लायंस की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
सरकार का मानना है कि कंप्लायंस को कारोबारियों के लिए डर या बोझ का कारण बनाने के बजाय इसे विश्वास, पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यवस्थित विकास का माध्यम बनाया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से प्रशिक्षित और प्रमाणित पैरा-प्रोफेशनल्स का एक ऐसा समूह तैयार किया जा रहा है, जो एमएसएमई को किफायती दरों पर प्रोफेशनल सहायता उपलब्ध करा सके।
बजट 2026-27 में हुई थी ‘कॉर्पोरेट मित्र’ की घोषणा
‘कॉर्पोरेट मित्र’ पहल की घोषणा केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में की थी। इस कार्यक्रम के तहत ऐसे प्रशिक्षित पैरा-प्रोफेशनल्स तैयार किए जाएंगे, जो छोटे और मध्यम कारोबारियों को बिजनेस से जुड़े नियमों और रेगुलेटरी कंप्लायंस को समझने और पूरा करने में मदद करेंगे।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की संयुक्त सचिव अनीता शाह अकेला के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य कंप्लायंस को एक बोझ की जगह भरोसे, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कारोबार के व्यवस्थित विकास का जरिया बनाना है।
ICAI, ICSI और ICOAI की विशेषज्ञता का मिलेगा फायदा
इस कार्यक्रम में देश की प्रमुख प्रोफेशनल संस्थाओं की विशेषज्ञता को तकनीकी और अकादमिक सहयोग के साथ जोड़ा गया है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI), इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICOAI) इस पहल में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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वहीं, IIT मद्रास, IIT मद्रास प्रवर्तक और स्वयं प्लस की तकनीकी एवं अकादमिक विशेषज्ञता को भी कार्यक्रम से जोड़ा गया है। तीनों प्रोफेशनल संस्थानों की ओर से ‘कॉर्पोरेट मित्र’ कोर्स शुरू किया जा चुका है। इसके पहले बैच में 2,879 शिक्षार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
12 महीने में तैयार होंगे प्रशिक्षित ‘कॉर्पोरेट मित्र’
‘कॉर्पोरेट मित्र’ कोर्स की कुल अवधि 12 महीने रखी गई है। इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा।
पहला चरण:
शुरुआती छह महीनों में करीब 150 घंटे की स्ट्रक्चर्ड अकादमिक लर्निंग होगी। यह प्रशिक्षण रिकॉर्डेड वीडियो लेक्चर के माध्यम से दिया जाएगा, जिससे शिक्षार्थी कारोबार और नियामकीय अनुपालन से जुड़े जरूरी विषयों को व्यवस्थित तरीके से समझ सकेंगे।
दूसरा चरण:
अगले छह महीनों में शिक्षार्थियों को ICAI, ICSI और ICOAI के सदस्यों की प्रोफेशनल फर्मों में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे उन्हें वास्तविक कारोबारी परिस्थितियों में काम करने और एमएसएमई को व्यावहारिक सहायता देने का अनुभव मिलेगा।
MSMEs को क्या फायदा होगा?
‘कॉर्पोरेट मित्र’ कार्यक्रम का सबसे बड़ा फायदा छोटे कारोबारियों को मिलने की उम्मीद है। प्रशिक्षित पैरा-प्रोफेशनल्स MSME को अलग-अलग कारोबारी और नियामकीय जरूरतों को समझने में मदद कर सकेंगे।
इससे छोटे कारोबारियों को कंप्लायंस संबंधी प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से समझने, जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने और अपने कारोबार को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। सरकार के मुताबिक, इस पहल से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, रोजगार सृजन और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
MSME सेक्टर के औपचारिकरण की दिशा में अहम कदम
भारत की अर्थव्यवस्था में MSME सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में छोटे कारोबारियों के लिए नियमों और कंप्लायंस को आसान बनाना कारोबार के विस्तार और औपचारिकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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