
Teachers’ Day Message: शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से मुलाकात कर शिक्षा, बच्चों के विकास और बदलती जीवनशैली से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को केवल कक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास से जोड़ने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सात लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी श्रद्धांजलि दी। शिक्षक दिवस हर वर्ष उनकी जयंती के अवसर पर मनाया जाता है।
बच्चों के बढ़ते Screen Time पर जताई चिंता
प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों की दिनचर्या और उनकी रचनात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में शिक्षकों और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को स्क्रीन से हटाकर ऐसी गतिविधियों से जोड़ा जाए, जिनमें उनकी रुचि और प्रतिभा विकसित हो।
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पीएम मोदी ने बच्चों को खेलकूद में अधिक भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि यहां खेलों से आशय वास्तविक मैदान में खेले जाने वाले खेलों से है, न कि वीडियो गेम से। उनका मानना है कि शारीरिक गतिविधियों से बच्चों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनका सामाजिक और मानसिक विकास भी बेहतर होता है।
रचनात्मक गतिविधियाँ को बढ़ावा देने की अपील
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से बच्चों को रचनात्मक कार्यों में शामिल करने पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों की कल्पनाशक्ति और जिज्ञासा को बनाए रखना बेहद जरूरी है। पढ़ाई के साथ कला, खेल, प्रयोग, संवाद और अन्य रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व को बेहतर तरीके से विकसित करने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने शिक्षकों से यह भी कहा कि शिक्षा को केवल किताबों और निर्धारित सिलेबस तक सीमित नहीं रखना चाहिए। शिक्षक यदि विद्यार्थियों के जीवन, उनकी समस्याओं, रुचियों और आसपास की परिस्थितियों से जुड़ेंगे तो पढ़ाई उनके लिए अधिक प्रभावी और रोचक बन सकती है।
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शिक्षकों ने साझा किए अपने अनुभव
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने भी प्रधानमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए। कुछ शिक्षकों ने बताया कि वे पढ़ाई को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर विद्यार्थियों को सीखने के नए अवसर देते हैं। एक शिक्षक ने बताया कि बच्चों को घर के बजट, भोजन और रोजमर्रा के फैसलों जैसे विषयों पर अपने माता-पिता से बातचीत और इंटरव्यू करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे बच्चों में सवाल पूछने, जानकारी जुटाने और रिपोर्ट तैयार करने जैसी क्षमताएं विकसित होती हैं।
वहीं, एक अन्य शिक्षक ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और सार्वजनिक रूप से बोलने की क्षमता बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने भी पब्लिक स्पीकिंग को लेकर उनसे सुझाव मांगे। शिक्षक ने नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास को बेहतर वक्ता बनने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
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