राहुल-रिजिजू बैठक के बाद बढ़ी हलचल, संसद में अहम विधेयकों पर सहमति की कोशिश

Delimitation Bill 2026

Delimitation Bill 2026 :  संसद में लगातार जारी गतिरोध को खत्म करने के प्रयास तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच अहम बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात में संसद के कामकाज को सुचारू करने और परिसीमन बिल को लेकर संभावित विशेष सत्र बुलाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

सरकार की कोशिश है कि विपक्ष के साथ संवाद स्थापित कर संसद में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों पर सहमति बनाई जा सके। हालांकि, इस बैठक को लेकर अभी तक सरकार या कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

15 अगस्त के बाद विशेष सत्र बुलाने की संभावना

सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार 15 अगस्त के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि यह विशेष सत्र 16 से 18 अगस्त के बीच आयोजित किया जा सकता है। इस दौरान सरकार की प्राथमिकता परिसीमन बिल पर चर्चा कर उसे पारित कराने की हो सकती है। इसके लिए सरकार अलग-अलग राजनीतिक दलों से संपर्क साध रही है, ताकि विधेयक को लेकर व्यापक सहमति बनाई जा सके।

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विपक्ष से बातचीत की जिम्मेदारी कई नेताओं को

संसद में जारी गतिरोध को दूर करने के लिए सरकार ने कई वरिष्ठ नेताओं को विपक्षी दलों से बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी है। सूत्रों के अनुसार, किरेन रिजिजू को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से संवाद करने की जिम्मेदारी दी गई है।

वहीं अन्य विपक्षी दलों के नेताओं से बातचीत का जिम्मा केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी, पीयूष गोयल, अर्जुन राम मेघवाल और एस. मुरुगन को दिया गया है। ये नेता विभिन्न दलों के साथ बातचीत कर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे।

FCRA संशोधन विधेयक भी पेश करने की तैयारी

इसके अलावा सरकार अगले सप्ताह विदेशी अंशदान विनियमन कानून 2026 को संसद में पेश करने की तैयारी में है। इस विधेयक के जरिए विदेशी अंशदान से जुड़े मौजूदा नियमों में बदलाव का प्रस्ताव लाया जा सकता है। हालांकि, विशेष सत्र की तारीख और एजेंडे को लेकर सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

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परिसीमन बिल का कांग्रेस कर चुकी है विरोध की घोषणा

परिसीमन बिल को लेकर कांग्रेस का रुख पहले से ही स्पष्ट है। पार्टी ने मानसून सत्र से पहले हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में फैसला किया था कि अगर सरकार परिसीमन से जुड़ा विधेयक लाती है तो उसका विरोध किया जाएगा। कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों की चिंता है कि परिसीमन की प्रक्रिया से राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बदलाव हो सकता है।

क्या है परिसीमन बिल?

परिसीमन बिल का संबंध लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों के पुनर्निर्धारण से है। सरकार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को प्रभावी बनाने के लिए परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहती है।

प्रस्तावित बदलाव के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रावधान किया जा सकता है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा जा सकता है। अगर यह विधेयक पारित होता है तो लोकसभा में सदस्यों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर 850 तक पहुंच सकती है। इनमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटों का प्रावधान प्रस्तावित है।

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