
विदेश मंत्रालय की दो टूक- ‘खुद का दामन दागदार, फिर क्यों भारत पर वार’
India Pakistan News : विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की भारत में मुस्लिम धार्मिक स्थलों को लेकर की गई टिप्पणी को भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मंत्रालय ने कहा कि मानवाधिकारों के मामले में खराब रिकॉर्ड रखने वाले पाकिस्तान को दूसरों को उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार देर रात जारी बयान में पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणी को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान को कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा की गई अनावश्यक टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करता है। किसी भी परिस्थिति में भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करना उनका अधिकार क्षेत्र नहीं है
। जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति की यह टिप्पणी इसलिए भी हास्यास्पद है क्योंकि मानवाधिकारों के मामले में पाकिस्तान का रिकॉर्ड स्वयं बेहद खराब रहा है और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाए जाने और उनके उत्पीड़न का लंबा इतिहास रहा है। ऐसे में भारत पर टिप्पणी करना तथ्यों से परे और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित कदम प्रतीत होता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणी को एक सुनियोजित राजनीतिक हमले के रूप में देखा जाना चाहिए, जो कट्टरता और घृणा पर आधारित नीतियों से प्रेरित है।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत में मुस्लिम धार्मिक स्थलों को लेकर की गयी पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणी पर शनिवार देर रात सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया।
श्री जायसवाल ने कहा कि भारत पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा की गयी अनावश्यक टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करता है। किसी भी स्थिति में भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि ये टिप्पणियाँ विशेष रूप से हास्यास्पद हैं, क्योंकि मानवाधिकारों के मामले में पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड अत्यंत खराब रहा है, जो वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय है। विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने और उनका उत्पीड़न करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास है।
उन्होंने कहा कि इस वास्तविकता को देखते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणियों को केवल एक सुनियोजित राजनीतिक हमले के रूप में ही देखा जा सकता है, जो पाकिस्तान की कट्टरता और घृणा पर आधारित राष्ट्रीय नीतियों से प्रेरित है।
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