खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था हमेशा से मजबूत मानी जाती रही है, खासकर तेल निर्यात के कारण। इन देशों की मुद्राएं भी वैश्विक बाजार में काफी अहम भूमिका निभाती हैं। अगर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इनकी वैल्यू को देखा जाए, तो कई दिलचस्प तथ्य सामने आते हैं। सबसे पहले बात करें सऊदी अरब की, तो यहां की मुद्रा सऊदी रियाल (SAR) है। इसकी वैल्यू लगभग 0.27 अमेरिकी डॉलर के बराबर रहती है। यह एक स्थिर करेंसी मानी जाती है, क्योंकि यह डॉलर से जुड़ी हुई है।
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वहीं संयुक्त अरब अमीरात की करेंसी दिरहम (AED) भी लगभग इसी स्तर पर है। 1 दिरहम की कीमत करीब 0.27 USD के आसपास रहती है। UAE की अर्थव्यवस्था भी तेल और पर्यटन पर आधारित है, जिससे इसकी मुद्रा स्थिर बनी रहती है। अगर ओमान की बात करें तो यहां का ओमानी रियाल (OMR) काफी मजबूत है। इसकी वैल्यू लगभग 2.60 अमेरिकी डॉलर के बराबर है, जो इसे दुनिया की मजबूत मुद्राओं में शामिल करती है।
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इसके बाद बहरीन का बहरीनी दीनार (BHD) आता है, जिसकी कीमत करीब 2.65 USD है। यह भी काफी मजबूत मुद्रा मानी जाती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी स्थिरता बनी हुई है। कतर की मुद्रा कतारी रियाल (QAR) है, जो डॉलर के साथ लगभग स्थिर अनुपात में बनी रहती है। इसकी वैल्यू भी वैश्विक बाजार में स्थिर मानी जाती है।
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हालांकि, इन सभी के बीच कुवैट की करेंसी सबसे ज्यादा मजबूत है। कुवैती दिनार (KWD) की कीमत लगभग 3.26 अमेरिकी डॉलर के बराबर है, जो इसे न केवल खाड़ी देशों बल्कि दुनिया की सबसे महंगी मुद्रा बनाती है। कुवैती दिनार के मजबूत होने की सबसे बड़ी वजह देश का विशाल तेल भंडार और निर्यात है। तेल से होने वाली कमाई के कारण देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह लगातार बना रहता है, जिससे इसकी मांग बढ़ती है और वैल्यू ऊंची बनी रहती है।
