मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय एविएशन सेक्टर पर साफ नजर आने लगा है। इस क्षेत्र में कई एयरपोर्ट या तो सीमित क्षमता पर काम कर रहे हैं या अस्थायी रूप से प्रभावित हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे हालात में भारत ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए साउथ-ईस्ट एशिया की ओर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ हवाई सेवाओं का विस्तार करने की योजना बना रही है। इस दिशा में पहले ही उच्च स्तरीय बैठकों में चर्चा हो चुकी है और अब नागरिक उड्डयन विभाग इन देशों के साथ नई उड़ानों और सीट क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
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मिडिल ईस्ट भारतीय एयरलाइंस के लिए एक प्रमुख बाजार रहा है। IndiGo, Air India और SpiceJet जैसी कंपनियों की बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें इसी क्षेत्र से जुड़ी रही हैं। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों के चलते इन एयरलाइंस को अपने विमान पूरी क्षमता से संचालित करने में दिक्कत हो रही है। ऐसे में साउथ-ईस्ट एशिया एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय पर्यटकों के बीच इन देशों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। आसान वीजा प्रक्रिया, कम खर्च और कम दूरी इसे यात्रियों के लिए आकर्षक बनाती है।
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पहले भी भारत ने इन देशों के साथ सीट क्षमता बढ़ाने के लिए समझौते किए हैं। उदाहरण के तौर पर इंडोनेशिया और वियतनाम के साथ उड़ानों की संख्या में बढ़ोतरी की जा चुकी है, जबकि थाईलैंड के साथ सीट क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। इस कदम का सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा। उन्हें ज्यादा विकल्प मिलेंगे, टिकट की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी और पीक सीजन में भी सीट उपलब्धता बेहतर होगी।
