पश्चिम बंगाल के मालदा में जजों को बनाया बंधक

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  • नौ घंटे बाद आधी रात को अर्धसैनिक बलों ने कराया मुक्त,
  • SIR में नाम कटने की अफवाह से नाराज हैं नागरिक,
  • सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी,
  • SC ने राज्य के वरीय अधिकारियों से किया जवाब तलब,
  • CBI या NIA जांच कराने की अनुमति

रंजन कुमार सिंह

पश्चिम बंगाल में SIR हटाने को लेकर ममता के तृणमूल का नंगा नाच चरम पर पहुंचता जा रहा है। प्रदर्शन इतना ज्यादा बढ़ गया कि 7 न्यायिक मजिस्ट्रेट को लोगों ने 8 घंटे तक घेर कर बंधक बना लिया। इस मामले पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को हस्तक्षेप करते हुए सख्त टिप्पणी करनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि यह कृत्य किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR – मतदाता सूची पुनरीक्षण) प्रक्रिया के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों (जजों) को 9 घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाए रखने और घेराव करने की घटना सामने आई है।  यह घटना मालदा के कालियाचक क्षेत्र में 1 अप्रैल 2026 की दोपहर को हुई, जब मतदाता सूची से नाम काटे जाने का विरोध कर रही भीड़ ने जजों को घेर लिया।

3 महिलाओं सहित कुल 7 न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घेरा था। अर्धसैनिक बलों और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद, उन्हें आधी रात के आसपास सुरक्षित निकाला जा सका। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है और इसे “सुनियोजित” (pre-planned) हमला बताया है। कोर्ट ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर सुरक्षा में विफलता के लिए जवाब मांगा है और केंद्रीय बलों को तैनात करने का निर्देश दिया है।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कई लोगों के नाम कटने से ग्रामीण आक्रोशित हैं। यह घटना अप्रैल 2026 में होने वाले चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव को बढ़ाती है।

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 काफी करीब है। ऐसे में बंगाल में SIR हटाने के विरोध में यहां प्रदर्शन इतना भड़क गया है कि मालदा में 7 न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे तक घेर लिया गया। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालती हैं और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल स्थित मालदा के एक गांव में हुए प्रदर्शन के दौरान यह घटना सामने आई, जहां प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों को घेर लिया और उन्हें वहां से जाने नहीं दिया। पश्चिम बंगाल SIR मामले को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा। उन्होंने कहा कि मुझे अभी टेलीग्राफ से एक रिपोर्ट मिली है।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि मैं इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहता। लेकिन हमें सुबह 2 बजे से ही रिपोर्ट मिल रही थी। यहां शाम 5 बजे उन्होंने अधिकारियों का घेराव किया और रात 11 बजे तक वहां कोई नहीं था। सिब्बल ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

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‘ज्यादातर अधिकारियों का तबादला हुआ है’,

वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि ज्यादातर अधिकारियों का तबादला राज्य से बाहर कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में हुए विरोध प्रदर्शन का गंभीर संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट ने मालदा गांव में हुए विरोध प्रदर्शन से संबंधित द टेलीग्राफ अखबार की रिपोर्ट का संदर्भ लिया।

‘ऐसा ध्रुवीकृत राज्य पहले कभी नहीं देखा’

मालदा जिले में एसआईआर ड्यूटी के दौरान न्यायाधीशों पर हुए हमले के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के बारे में कहा कि हमने ऐसा ध्रुवीकृत राज्य पहले कभी नहीं देखा। मुख्य न्यायाधीश ने पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल से कहा कि दुर्भाग्य से आपके राज्य में आप सभी राजनीतिक भाषा बोलते हैं। यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात है। हमने ऐसा ध्रुवीकृत राज्य पहले कभी नहीं देखा। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों को बुलाने का निर्देश दिया। चुनाव आयोग को घटना की जांच CBI या NIA जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने के लिए कहा गया।

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