नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ टिकट कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। एक अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इन नियमों का असर देशभर के करोड़ों यात्रियों पर सीधे तौर पर पड़ेगा। नए नियमों के अनुसार, अब यात्रियों को ट्रेन के निर्धारित समय से कम से कम 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल करना अनिवार्य होगा। अगर कोई यात्री इस समय सीमा के अंदर टिकट कैंसिल नहीं करता है, तो उसे किसी भी प्रकार का रिफंड नहीं मिलेगा। यह बदलाव पहले के नियमों से काफी सख्त है, क्योंकि पहले यात्रियों को 4 घंटे पहले तक टिकट कैंसिल करने पर रिफंड मिल जाता था।
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रेल मंत्रालय के अनुसार, यह कदम यात्रियों में अनुशासन बढ़ाने और सीटों के बेहतर प्रबंधन के लिए उठाया गया है। अश्विनी वैष्णव ने भी हाल ही में इस बदलाव की जानकारी देते हुए कहा कि समय पर टिकट कैंसिल करना अब बेहद जरूरी होगा, अन्यथा यात्रियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। नए नियमों में रिफंड की व्यवस्था भी चरणबद्ध तरीके से तय की गई है। अगर कोई यात्री ट्रेन के प्रस्थान समय से 72 घंटे पहले टिकट कैंसिल करता है, तो उसे पूरा 100 प्रतिशत रिफंड मिलेगा। वहीं, 24 से 72 घंटे के बीच कैंसिल करने पर 75 प्रतिशत रिफंड दिया जाएगा।
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इसके अलावा, 8 से 24 घंटे के बीच टिकट कैंसिल करने पर यात्रियों को केवल 50 प्रतिशत राशि वापस मिलेगी। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव यह है कि यदि टिकट ट्रेन के प्रस्थान से 8 घंटे के अंदर कैंसिल किया जाता है, तो कोई भी रिफंड नहीं मिलेगा। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पहले की तरह ही कैंसिलेशन चार्ज लागू रहेंगे। यानी यात्रियों को रिफंड के साथ-साथ कुछ निर्धारित शुल्क भी देना होगा। इस नए नियम का उद्देश्य रेलवे में खाली सीटों की समस्या को कम करना और अंतिम समय में टिकट रद्द करने की प्रवृत्ति को रोकना है। हालांकि, इससे उन यात्रियों को परेशानी हो सकती है जो अचानक यात्रा योजनाओं में बदलाव करते हैं। इसलिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से तय करें और किसी भी बदलाव की स्थिति में समय रहते टिकट कैंसिल कर दें, ताकि उन्हें किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
