शिमला में इलेक्ट्रिक बर्नर का जलवा , LPG संकट के बीच बिक्री में जबरदस्त उछाल

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शिमला। एलपीजी सिलेंडरों की कमी का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गैस की उपलब्धता प्रभावित होने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं और व्यापारियों ने वैकल्पिक उपायों की तलाश शुरू कर दी है। इस वजह से बाजार में इंडक्शन चूल्हों और इलेक्ट्रिक बर्नर की मांग अचानक बढ़ गई है। व्यापारियों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में इन उपकरणों की बिक्री कई गुना बढ़ गई है। खासतौर पर होटल, ढाबों और रेस्टॉरेंट संचालकों के सामने खाना बनाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, क्योंकि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में कई कारोबारियों ने अपनी रसोई को चालू रखने के लिए बिजली से चलने वाले उपकरणों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

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शिमला के एक दुकानदार दिव्येश का कहना है कि पहले उनके यहां इंडक्शन चूल्हों और इलेक्ट्रिक बर्नर की बिक्री काफी सीमित थी। आमतौर पर सप्ताह भर में तीन से चार यूनिट ही बिकते थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने बताया कि अब एक ही दिन में आठ से नौ यूनिट तक बिक रहे हैं। इसके साथ ही इंडक्शन के अनुकूल बर्तनों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। एक अन्य दुकानदार एस.एन. शर्मा के अनुसार बाजार में घबराहट के कारण खरीदारी का माहौल बन गया है। लोग भविष्य में गैस की कमी को लेकर आशंकित हैं, इसलिए पहले से ही वैकल्पिक उपकरण खरीद रहे हैं। इसके चलते कई दुकानों में स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है।

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एलपीजी की कमी का असर पर्यटन उद्योग पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। शिमला में होटल और रेस्टॉरेंट संचालकों का कहना है कि गैस की उपलब्धता प्रभावित होने से उनके संचालन पर असर पड़ा है। होटल लैंडमार्क के मैनेजर संदीप सोनी ने बताया कि उनके होटल में एलपीजी पूरी तरह खत्म हो चुकी है। फिलहाल रसोई में खाना बनाने के लिए इलेक्ट्रिक उपकरणों और लकड़ी का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन व्यंजनों को गैस पर पकाना जरूरी होता है, उन्हें फिलहाल मेनू से हटाना पड़ा है। इसके अलावा होटल की लगभग 30 से 40 प्रतिशत बुकिंग भी रद्द हो चुकी हैं, जिससे कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। गैस की कमी के कारण कोयले की मांग में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि कोयला डीलरों का कहना है कि फिलहाल कीमतें स्थिर हैं और बाजार में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। इसके बावजूद अचानक बढ़ी मांग के कारण भविष्य में कीमतों पर असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एलपीजी आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो इसका असर पर्यटन और स्थानीय व्यापार पर और अधिक पड़ सकता है।

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