राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू आज जीवित होते, तो वे बहुजन आंदोलन के प्रमुख नेता कांशी राम को कांग्रेस से ही मुख्यमंत्री बनाने का रास्ता तैयार कर देते।
राहुल गांधी यह बात कांशीराम की जयंती से पहले आयोजित एक संविधान सभा में बोलते हुए कही। उन्होंने कहा कि देश के कई महान नेताओं ने अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि महात्मा गांधी, बी. आर. अंबेडकर और कांशीराम जैसे नेताओं ने अपने जीवन में सामाजिक न्याय और समानता के लिए संघर्ष किया। इन नेताओं की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी ने उस दौर में सामाजिक न्याय की दिशा में और मजबूत कदम उठाए होते, तो कांशीराम को अलग राजनीतिक मंच बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। राहुल गांधी के मुताबिक, अगर नेहरू जीवित रहते तो वे कांशीराम को कांग्रेस के भीतर ही बड़ी भूमिका देते और संभवतः उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका भी मिलता।
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राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान देश की ऊर्जा नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा के मामले में देश के हितों से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि आज ऐसी स्थिति बन गई है कि अमेरिका यह तय कर रहा है कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा।
उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को संसद में उठाना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय बताया। अपने संबोधन में उन्होंने डॉ. अंबेडकर के जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर यह बताते हैं कि अंबेडकर ने विदेशों में पढ़ाई की, दलित समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और समाज सुधार के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
लेकिन राहुल गांधी के अनुसार अंबेडकर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया। यही बात उन्हें महान बनाती है और यही संदेश आज की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है।
