लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल काफी गरम हो गया। इस बहस में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला और कई आरोप लगाए। बहस के दौरान जब विपक्षी सांसदों ने लगातार विरोध जताया, तब उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि “सुनो, अब सुनना पड़ेगा।” उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ समय के लिए हंगामा भी देखने को मिला।
चर्चा के दौरान अमित शाह ने विशेष रूप से विपक्ष के नेता Rahul Gandhi का नाम लेते हुए उनके संसदीय रिकॉर्ड और उपस्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण मौकों पर राहुल गांधी सदन में मौजूद नहीं रहे। गृह मंत्री ने दावा किया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव जैसी महत्वपूर्ण बहसों में भी उन्होंने कई बार हिस्सा नहीं लिया। शाह ने यह भी कहा कि विपक्ष बार-बार आरोप लगाता है कि उन्हें सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया जाता, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। उनके अनुसार, संसद में किसे और कितना बोलने का अवसर मिलेगा, इसका निर्णय सरकार नहीं बल्कि स्पीकर करते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने Om Birla की भूमिका का भी उल्लेख किया।
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अपने भाषण में गृह मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार बजट सत्र या अन्य महत्वपूर्ण संसदीय सत्रों के दौरान राहुल गांधी विदेश यात्रा पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में यह कहना उचित नहीं है कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता। उनके मुताबिक अगर कोई सांसद सदन में मौजूद ही नहीं है तो वह अपनी बात कैसे रख सकता है। बहस के दौरान विपक्षी सांसदों ने भी इन आरोपों का विरोध किया और कई बार बीच में टोका-टोकी की। इसी दौरान शाह ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब तथ्यों के साथ बात रखी जा रही है तो विपक्ष को उसे सुनना चाहिए।
अमित शाह ने अपने भाषण में यह भी कहा कि संसद नियमों और अनुशासन से चलती है। अगर कोई सदस्य नियमों का पालन नहीं करता है तो स्पीकर को हस्तक्षेप करना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि माइक्रोफोन बंद होना या बोलने से रोकना किसी एक दल के साथ नहीं बल्कि नियमों के अनुसार होता है।
