मुख्यमंत्री का निर्देश जेल अफसरों के ठेंगे पर!

आईजी
  • जेलों पर तैनात अधिकारी नहीं उठाते सीयूजी फोन
  • कारागार मुख्यालय के अधिकारियों का भी नहीं उठता फोन

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। मुख्यमंत्री के तमाम निर्देशों के बाद भी अधिकारी सुधरने का नाम नहीं ले रहे है। प्रदेश के कारागार विभाग में आला अफसरों की लचर व्यवस्था से विभाग के जेल अधिकारी सीयूजी (सरकारी) फोन तक नहीं उठाते है। कई अधिकारी तो कार्यालय अवधि के दौरान भी अपना सीयूजी फोन ऑफ तक रखते है। इसकी वजह से आम जनता के साथ इनका पक्ष लेने के लिए संपर्क नहीं हो पा रहा है।

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प्रदेश की जेलों में त्वरित रिस्पॉन्स देने के लिए सरकार ने प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को सरकारी फोन (सीयूजी) नंबर अलाट कर रखा है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय को इस बात की लगातार शिकायतें मिल रही है कि अधिकारी सरकारी फोन या तो ऑफ रखते है और यदि फोन ऑन भी रहता है तो वह फोन उठते ही नहीं है। बीते दिनों मुख्यमंत्री ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के समस्त विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि सीयूजी नंबर बंद न रखा जाए और फोन आने पर फोन उठाया जाए। मुख्यमंत्री का यह निर्देश अधिकारियों के लिए कोई मायने नहीं रखता है। यही वजह है कि अधिकारी फोन नहीं उठा रहे है।

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प्रदेश के कारागार विभाग में जेलों पर हुई घटनाओं की पुष्टि करने के लिए जब जेल अधिकारियों को फोन किया जाता है तो अधिकांश अधिकारियों को फोन या तो स्विच ऑफ मिलता है या फिर घंटी जाने के बाद भी अधिकारी फोन उठाते ही नहीं है। इसकी पुष्टि करने के लिए जब सीतापुर, आगरा, मुरादाबाद समेत कई जेल अधीक्षक को फोन किया गया तो उनका फोन कई प्रयासों के बाद भी नहीं उठा। मुख्यालय के प्रभारी बाबू अधिकारी को जब फोन किया गया तो पता चला कि वह अपना सीयूजी फोन घर पर भूल गए हैं। वर्तमान में जेलों के लिए हो रही साढ़े नौ करोड़ की मसाला खरीद फरोख्त की जानकारी प्राप्त करने के लिए जब उद्योग अनुभाग की अधिकारी को फोन किया गया तो उनका भी फोन नहीं उठा। उधर डीजी जेल पीसी मीणा ने कहा कि यह अनुशासनहीनता है। इसकी जांच कराई जाएगी पुष्टि होने पर कार्यवाही की जाएगी। शासन के वरिष्ठ अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।

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आला अफसरों का मातहतों पर कोई नियंत्रण नहीं!

जेल मुख्यालय के बाबुओं पर भी आला अफसरों का कोई नियंत्रण नहीं है। फोन के माध्यम से गोपनीय सूचनाओं का त्वरित आदान प्रदान करने वाले यह बाबू भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। सूत्रों की माने तो निजी फोन से सूचनाओं का आदान प्रदान करने वाले बाबुओं का सीयूजी फोन या तो बंद मिलता है या फिर उठता ही नहीं है। दिलचस्प बात तो यह है कि विभाग के कई आला अफसर सीयूजी फोन उठाने अपनी तौहीन समझते है।

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