तिब्बत में बुधवार सुबह भूकंप के झटकों से धरती हिल गई। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.0 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र जमीन की सतह से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भूकंप के झटके सुबह के समय महसूस किए गए, जिससे कुछ देर के लिए स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
एनसीएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भूकंप की पुष्टि की है। हालांकि, इस भूकंप से किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कम तीव्रता वाला भूकंप था, लेकिन चूंकि इसका केंद्र उथला था, इसलिए झटके महसूस किए गए।
मणिपुर में भी लगे थे झटके
तिब्बत से पहले भारत के मणिपुर राज्य में भी भूकंप के झटके दर्ज किए गए थे। यहां रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 3.6 मापी गई थी। इसका केंद्र मणिपुर के कामजोंग जिले में बताया गया। हालांकि वहां भी किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई, लेकिन लोगों ने झटकों को साफ तौर पर महसूस किया।
उथले भूकंप क्यों होते हैं ज्यादा खतरनाक
भूवैज्ञानिकों के अनुसार, उथले भूकंप गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक खतरनाक माने जाते हैं। इसकी वजह यह है कि भूकंपीय तरंगों को सतह तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे कंपन ज्यादा तीव्र होता है। ऐसे भूकंप इमारतों, सड़कों और बुनियादी ढांचे को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
तिब्बत क्षेत्र खास तौर पर भूकंपीय गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता है। यह इलाका भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव क्षेत्र में आता है, जिससे यहां समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं।
हाल के दिनों में बढ़ी भूकंपीय गतिविधि
पिछले कुछ दिनों में भूकंपीय गतिविधियों में तेजी देखी गई है। 19 जनवरी को लद्दाख के लेह क्षेत्र में 5.7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र लगभग 171 किलोमीटर की गहराई में था। इसी दिन दिल्ली में भी 2.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसका केंद्र उत्तरी दिल्ली में स्थित था।
क्यों आते हैं भूकंप
भूकंप पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों के हिलने या टकराने से आते हैं। इसके अलावा ज्वालामुखी विस्फोट, भूस्खलन और मानव गतिविधियां भी भूकंप की वजह बन सकती हैं। प्रशांत महासागर के चारों ओर स्थित “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र को दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय इलाका माना जाता है।
